दुर्ग के निलंबित जनपद CEO की भूपेश बघेल से मुलाकात पर सियासत तेज, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

दुर्ग जनपद पंचायत के निलंबित मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश कुमार पांडेय की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। निलंबन आदेश जारी होने के कुछ ही समय बाद हुई इस मुलाकात को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए हैं, जबकि रूपेश पांडेय ने इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया है।
रूपेश पांडेय का कहना है कि उन्हें पहले से ही निशाना बनाया जा रहा था और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई एकपक्षीय है। उन्होंने निलंबन आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।
निलंबन के बाद मुलाकात पर बढ़ा विवाद
निलंबन के बाद रूपेश पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने इस मुलाकात को लेकर सवाल खड़े करते हुए अधिकारी की निष्पक्षता पर टिप्पणी की है।
हालांकि रूपेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि वे पहले पाटन जनपद पंचायत में पदस्थ रह चुके हैं और उसी दौरान उनका भूपेश बघेल से परिचय हुआ था। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक मुलाकात थी और इसका किसी राजनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
रूपेश पांडेय ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम में उनका पक्ष ठीक से नहीं सुना गया। उन्होंने बताया कि पहले वे मुख्य सचिव के समक्ष अपील करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अधूरा है। उनके अनुसार सार्वजनिक रूप से प्रसारित वीडियो केवल कुछ सेकंड का है, जबकि पूरी रिकॉर्डिंग कहीं अधिक लंबी है और उसमें पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति दिखाई देती है।
सुशासन शिविर में हुई थी तीखी बहस
पूरा विवाद सुशासन तिहार के दौरान आयोजित एक जनसमस्या निवारण शिविर से शुरू हुआ था। सामुदायिक भवन के लिए राशि जारी करने को लेकर भाजपा नेता पुराण देशमुख और रूपेश पांडेय के बीच बहस हो गई थी, जो बाद में तीखी नोकझोंक में बदल गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और रूपेश पांडेय को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंप दिया गया है। अब इस मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक रंग भी ले लिया है।





