महाकुंभ में सियासी संग्राम: ठाकरे बोले – डुबकी से नहीं धुलेगा शिंदे का ‘पाप’!

महाकुंभ :महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर घमासान मचा हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान गंगा स्नान को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। ठाकरे ने शिंदे पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि गंगा में डुबकी लगाने से महाराष्ट्र को धोखा देने का पाप नहीं धुलेगा।

ठाकरे का शिंदे पर बड़ा हमला

मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “गंगा में डुबकी लगाने से कोई पवित्र नहीं हो जाता। महाराष्ट्र के साथ जो विश्वासघात हुआ है, वह गंगा में हजार बार नहाने से भी नहीं धुलेगा।” हालांकि, उन्होंने शिंदे का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना साफ था।ठाकरे ने आगे कहा, “मैं गंगा का सम्मान करता हूं, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं जब आप पहले अपने ही लोगों को धोखा देते हैं और फिर धार्मिक आयोजनों में जाकर खुद को पवित्र साबित करने की कोशिश करते हैं।”

उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा और कहा, “आज देश उन लोगों के हाथों में है, जिनका स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना-देना नहीं था, और राज्य उन लोगों के हाथों में है, जिनका संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

शिंदे ने भी किया पलटवार

इससे पहले, एकनाथ शिंदे ने महाकुंभ में शामिल न होने को लेकर उद्धव ठाकरे पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था, “जो खुद को हिंदू कहते हैं, उन्हें महाकुंभ जैसे पवित्र आयोजन में जरूर आना चाहिए था। जो नहीं आए, उनसे पूछा जाना चाहिए कि वे क्यों नहीं आए।”शिंदे ने आगे कहा, “बालासाहेब ठाकरे ने गर्व से ‘हम हिंदू हैं’ का नारा दिया था। लेकिन अब कुछ लोग खुद को हिंदू कहलाने से भी डरते हैं और सिर्फ बालासाहेब को ‘हिंदूहृदय सम्राट’ कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।”

शिंदे-ठाकरे की सियासी दुश्मनी की जड़ें

2022 में शिवसेना में बगावत के बाद से ही उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच तल्खी बनी हुई है। शिंदे ने 39 विधायकों के साथ पार्टी से अलग होकर बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई थी। ठाकरे गुट का आरोप है कि शिंदे और उनके समर्थक विधायकों ने 50 करोड़ रुपये लेकर पार्टी से गद्दारी की।शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना बताता है, जबकि ठाकरे गुट इसे विश्वासघात करार देता है। यही वजह है कि दोनों नेताओं के बीच हर मुद्दे पर सियासी बयानबाजी जारी रहती है।

क्या महाकुंभ बना नया राजनीतिक अखाड़ा?

महाकुंभ धार्मिक आयोजन है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में यह सियासी अखाड़ा बनता जा रहा है। शिंदे और उनके समर्थकों ने गंगा स्नान कर खुद को असली हिंदूवादी साबित करने की कोशिश की, जबकि ठाकरे ने इसे दिखावा बताया।इस जुबानी जंग से साफ है कि आने वाले दिनों में भी महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और शिवसेना की असली विरासत को लेकर खींचतान जारी रहेगी।

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