केरल का नाम ‘केरलम’ करने के फैसले से सियासत गरम, ममता ने उठाया ‘बांग्ला’ का मुद्दा

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया शुरू करने के फैसले ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा चुनाव से पहले आए इस निर्णय को एक ओर सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इस फैसले के तहत नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।

ममता बनर्जी ने साधा निशाना

ममता बनर्जी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जुलाई 2018 में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब तक उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ‘बांग्ला’ नाम के पक्ष में नहीं है। एक प्रमुख कारण यह बताया जा रहा है कि ‘बांग्ला’ नाम बांग्लादेश से मिलता-जुलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बन सकती है।

विदेश मंत्रालय की आपत्ति

सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई थी। किसी राज्य का नाम बदलना एक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें रेलवे, डाक, उड्डयन समेत कई विभागों में बदलाव करना पड़ता है। साथ ही संसद में सामान्य बहुमत से विधेयक पारित कराना भी जरूरी होता है।

ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ

1947 के विभाजन के बाद बंगाल दो हिस्सों में बंट गया—पूर्वी और पश्चिमी। 1971 में पूर्वी बंगाल अलग होकर बांग्लादेश बना, जबकि भारत में पश्चिम बंगाल नाम कायम रहा। ममता बनर्जी इसे बदलकर ‘बांग्ला’ करना चाहती हैं।

वहीं केंद्र सरकार ऐतिहासिक संदर्भ, प्रशासनिक जटिलताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस प्रस्ताव से दूरी बनाए हुए है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि नाम परिवर्तन की यह पहल सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान है या फिर चुनावी राजनीति का नया औजार।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई