रायपुर पुलिस में तबादला आदेश हवा-हवाई? कई थानों में सालों से जमे पुलिसकर्मी, सवालों के घेरे में व्यवस्था

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई तबादला सूची के बाद भी जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। अपराध पर लगाम लगाने और वर्षों से एक ही थाने में जमे पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए तबादले किए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि कई थानों में आज भी वही अधिकारी और कर्मचारी जमे हुए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस कप्तान लाल उम्मेद सिंह ने साफ निर्देश दिए थे कि लंबे समय से एक ही जगह तैनात अधिकारियों को हटाया जाएगा। इसके बावजूद कई थाना क्षेत्रों में सब इंस्पेक्टर, एएसआई, प्रधान आरक्षक, आरक्षक और नगर सैनिक सालों से एक ही इलाके में पदस्थ हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक एएसआई पिछले करीब 25 सालों से रायपुर शहर में ही तैनात है। ट्रांसफर के नाम पर वह केवल कोतवाली, पुरानी बस्ती, गंज और टिकरापारा जैसे थानों के बीच ही घूमता रहा। नियमों के अनुसार, तय समय के बाद पुलिसकर्मियों को दूसरे जिले या क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए, लेकिन यहां नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं।
इसी तरह रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र में भी एक नगर सैनिक के वर्षों से एक ही थाने में जमे होने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी पकड़ इतनी मजबूत है कि वह थाने की कार्यप्रणाली में प्रभावशाली भूमिका निभाता है।
लंबे समय तक एक ही इलाके में तैनाती से पुलिसकर्मियों की स्थानीय नेटवर्किंग मजबूत हो जाती है। आरोप हैं कि इसी वजह से सट्टा, गांजा, अवैध शराब, जुआ और रेत उत्खनन जैसे अवैध कारोबार खुलेआम चल रहे हैं। कई नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मी इन धंधों से हफ्ता वसूली करते हैं और बदले में कार्रवाई से संरक्षण देते हैं।
तबादला आदेशों में साफ कहा गया था कि वर्षों से जमे कर्मचारियों को हटाया जाएगा, लेकिन कई अधिकारी 5 से 10 सालों से एक ही थाने में बने हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि इनके स्थानीय राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क मजबूत हैं, जिसकी वजह से ट्रांसफर आदेशों का भी असर नहीं हो पा रहा।
पुलिस पर लगे इन आरोपों से आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब कानून के रक्षक ही अपराधियों को संरक्षण देंगे, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे होगी। राजधानी में चोरी, लूट और नशे के मामलों में बढ़ोतरी ने पुलिस पर भरोसे को कमजोर किया है।
नगर सैनिकों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ नगर सैनिक वर्षों से एक ही थाने में रहकर अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।



अब बड़ा सवाल यह है कि क्या रायपुर पुलिस में ट्रांसफर नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा या फिर यह भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी। जनता और विभाग के भीतर से बढ़ते दबाव के बीच पुलिस प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि निष्पक्ष कार्रवाई होती है, तो राजधानी में अपराध पर काबू पाने की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकता है।





