Pitru Paksha 2025: पितृलोक से जुड़ी 7 निशानियां, पूर्वजों की नाराज़गी का संकेत

पितृपक्ष का समय पूर्वजों को स्मरण करने और उनका आशीर्वाद पाने का होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान पितर धरती पर अपने वंशजों का हाल-चाल देखने आते हैं। कई बार संकेतों के जरिए वे यह जताते हैं कि वे प्रसन्न नहीं हैं। गरुड़ पुराण और धर्मशास्त्र बताते हैं कि यदि घर में कुछ खास घटनाएं बार-बार घटने लगें तो समझ लेना चाहिए कि पितृ नाराज़ हैं और उन्हें श्राद्ध या तर्पण की आवश्यकता है।

ऐसी 7 प्रमुख निशानियां मानी जाती हैं—पितृपक्ष में घर की छत या आंगन में कौवों का लगातार आना और कांव-कांव करना, सपनों में पितरों का दिखना और भोजन या जल मांगना, अचानक आर्थिक संकट का आना, घर में लगातार बीमारियों का बढ़ना, पूजा या श्राद्धकर्म के दौरान दीपक का अपने आप बुझ जाना, पूजा-पाठ में बार-बार रुकावटें आना और घर में तुलसी का सूख जाना।

शास्त्रों में कहा गया है कि यदि ये संकेत दिखाई दें तो पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, ब्राह्मण भोज, गौ दान और जल तर्पण अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि लौट आती है।

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