सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की सख्ती से बढ़ा विवाद, कर्मचारियों ने आंदोलन की दी चेतावनी

छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिनमें अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई गई, बैठकों से बाहर भेजा गया और कुछ मामलों में निलंबन की कार्रवाई भी हुई। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह अभियान प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया, जबकि कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा है।
सुशासन तिहार के दौरान कई अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
अभियान की शुरुआत के बाद विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। बलरामपुर में समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधूरी जानकारी देने पर एक अधिकारी को बैठक से बाहर जाने के निर्देश दिए। वहीं भाटापारा में राजस्व मंत्री ने शिकायतों के आधार पर एक पटवारी के निलंबन का आदेश दिया।
गरियाबंद जिले में एक जनसभा के दौरान विधायक द्वारा पटवारी के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणी भी चर्चा में रही। रायपुर, बेमेतरा और अन्य जिलों में भी सांसदों, मंत्रियों और विधायकों ने मंच से अधिकारियों को फटकार लगाई तथा कई मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिए।
चिरमिरी में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान खाद वितरण में अनियमितता सामने आने पर मुख्यमंत्री ने एक सहायक आयुक्त को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं दुर्ग जिले में वायरल वीडियो के बाद जनपद पंचायत के एक सीईओ को भी निलंबित कर दिया गया।
विधायक-अधिकारी विवाद ने प्रदेशभर में खींचा ध्यान
सुशासन तिहार के दौरान ही सरगुजा जिले का विधायक और नायब तहसीलदार के बीच विवाद भी प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और मामले में काउंटर एफआईआर दर्ज हुई।
विवाद बढ़ने के बाद प्रदेशभर के करीब 500 तहसीलदार हड़ताल पर चले गए। अधिकारियों ने सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। बाद में सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त हुई। प्रशासनिक स्तर पर संबंधित अधिकारी का तबादला भी किया गया।
कर्मचारी संगठनों का विरोध, जवाबदेही पर बहस तेज
छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने जनप्रतिनिधियों द्वारा सार्वजनिक मंचों से की जा रही फटकार का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की भी गरिमा होती है और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना उचित नहीं है।
फेडरेशन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि जनता की शिकायतों के समाधान और जवाबदेही तय करने के लिए सख्त रवैया जरूरी है।
सुशासन तिहार के दौरान सामने आए घटनाक्रमों ने प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कर्मचारियों के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जनता को त्वरित कार्रवाई का संदेश मिला, तो दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों ने इसे सार्वजनिक अपमान का मुद्दा बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।





