SECL मुख्यालय का घेराव, प्रभावित ग्रामीणों ने की बड़े आंदोलन की घोषणा

कोयला खदान प्रभावित भूविस्थापितों ने आज SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) मुख्यालय का घेराव किया और मुख्य गेट को जाम कर दिया। यह आंदोलन रायगढ़, कोरबा, चिरमिरी और सराईपाली परियोजना जैसे विभिन्न क्षेत्रों से प्रभावित ग्रामीणों द्वारा किया गया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और विस्थापन के लाभों को लेकर था। वे SECL प्रबंधन से अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की अपील कर रहे थे।

ग्राम बुडबुड के ग्रामीणों ने पहले ही SECL को चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो वे उत्खनन और डिस्पैच कार्य को ठप कर देंगे। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में ‘एक कंपनी, एक नियम’ के तहत विस्थापन और पुनर्वास नीति का पालन, हाईकोर्ट के आदेशानुसार छोटे खातेदारों को रोजगार देना, भूविस्थापित परिवारों को ठेका कार्य में 20% आरक्षण देना, और आउटसोर्सिंग कंपनियों में 80% स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग शामिल है।

इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए CSR फंड का सही तरीके से उपयोग, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, एंबुलेंस सुविधा और महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार की व्यवस्था की भी मांग की गई है।

विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए, बरौद, नरई बोध और बुड़बुड़ खदान के लोग SECL कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे परियोजना के उत्खनन और डिस्पैच को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे, और इसके लिए SECL प्रबंधन जिम्मेदार होगा।

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