जातिगत जनगणना के केंद्र सरकार के फैसले का ओबीसी महासभा ने किया स्वागत, कहा– समतामूलक समाज की दिशा में ऐतिहासिक कदम

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय जनगणना को जाति आधारित करने का फैसला लिया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय का ओबीसी महासभा और पूरे ओबीसी समुदाय ने जोरदार स्वागत किया है।

बिलासपुर जिला ओबीसी महासभा अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि यह फैसला भारत में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि संविधान में समाज के कमजोर वर्गों को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन अब तक केवल एससी और एसटी की ही हर दशक में जनगणना होती आई है।

सुनील यादव ने कहा,
“1931 के बाद से अब तक ओबीसी की जाति आधारित कोई आधिकारिक जनगणना नहीं हुई है। आज़ाद भारत में पहली बार ओबीसी की गणना की जाएगी, जिससे उनकी वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।”

उन्होंने इसे बहुसंख्यक ओबीसी समुदाय को आबादी के अनुपात में हक और हिस्सेदारी दिलाने की दिशा में बड़ा और जरूरी कदम बताया।

जातिगत जनगणना से सरकार को विभिन्न जातीय वर्गों की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति के आँकड़े एकत्र करने में मदद मिलेगी, जिससे योजनाओं का लाभ ज्यादा सटीकता से पहुंचाया जा सकेगा।

ओबीसी महासभा ने केंद्र सरकार को इस साहसिक निर्णय के लिए धन्यवाद देते हुए इसे “समतामूलक समाज की स्थापना की ओर एक निर्णायक पहल” करार दिया है।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button