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यूजीसी के नए नियमों पर ओबीसी महासभा का समर्थन, विरोध और समर्थन आमने-सामने

बिलासपुर।यूजीसी द्वारा लागू किए गए “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026” को लेकर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। जहां स्वर्ण समाज के संगठनों ने इन नियमों का विरोध शुरू किया है, वहीं ओबीसी वर्ग ने इन्हें शिक्षा व्यवस्था में बराबरी लाने वाला कदम बताते हुए खुला समर्थन दिया है।

इसी क्रम में ओबीसी महासभा छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई के सदस्यों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। महासभा ने यूजीसी के नए नियमों को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताते हुए कहा कि ये कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में समानता, सम्मान और सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार करेंगे।

ओबीसी महासभा का कहना है कि वर्षों से वंचित और पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव का सामना करना पड़ा है। नए विनियम इस भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में सीधे और प्रभावी कदम हैं। नियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र की स्थापना अनिवार्य होगी, जहां छात्रों को शैक्षणिक सहायता, काउंसलिंग, करियर मार्गदर्शन और अधिकारों से जुड़ी जानकारी मिलेगी।

इसके साथ ही हर संस्थान में समानता समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान हो सके।

वहीं, ओबीसी महासभा ने जनगणना 2027 को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। महासभा ने मकान सूचीकरण के लिए जारी 33 बिंदुओं वाली प्रश्नावली के प्रश्न संख्या 12 में ओबीसी श्रेणी का उल्लेख न होने पर कड़ा विरोध जताया। मांग की गई है कि प्रश्न संख्या 12 में तत्काल ओबीसी श्रेणी जोड़ी जाए और जाति गणना की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।

महासभा ने स्पष्ट कहा कि सामाजिक न्याय और समानता के बिना मजबूत लोकतंत्र की कल्पना संभव नहीं है।

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