नन गिरफ्तारी केस: आज NIA कोर्ट में जमानत पर फैसला, पीड़िता बोली- मारपीट कर जबरन बयान बदलवाया गया

बिलासपुर। 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दो ननों, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियों को मानव तस्करी के आरोप में पकड़ा था। आरोप था कि वे लड़कियों को आगरा ले जाकर धर्मांतरण कराना चाहते थे। इस मामले में दोनों कैथोलिक नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस – पिछले 9 दिनों से जेल में हैं। मामला संसद तक पहुंच चुका है और आज (2 अगस्त) बिलासपुर NIA कोर्ट में ननों की जमानत पर फैसला आना है।

इस केस में GRP ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। दुर्ग कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि मामला गंभीर है और जनजातीय बालिकाओं से जुड़ा है। इधर, एक पीड़िता कमलेश्वरी ने मीडिया के सामने बयान दिया कि ननों ने कोई गलत काम नहीं किया और उन्हें जबरन बयान बदलने पर मजबूर किया गया। उसने कहा कि वह और अन्य लड़कियां अपनी मर्जी से जा रही थीं।

इस गिरफ्तारी के खिलाफ केरल से लेकर छत्तीसगढ़ तक प्रदर्शन हुए। लोकसभा और राज्यसभा में मामला उठा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इसे धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बताया। केरल के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल में ननों से मिला और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की। अब निगाहें बिलासपुर NIA कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। अगर जमानत मिलती है, तो यह केस नए मोड़ ले सकता है। इस बीच, सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह धार्मिक और राजनीतिक द्वेष का मामला तो नहीं?

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