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सिंचाई परियोजनाओं में लापरवाही नहीं चलेगी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में चल रही और प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें तय समय-सीमा में और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे अहम है। खेती का रकबा बढ़ रहा है, ऐसे में मजबूत और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिंचाई परियोजनाओं के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए अलग से बजटीय प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

बैठक में बताया गया कि अगले तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 बड़ी सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जाएंगी, जिससे करीब 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इनमें बस्तर की देउरगांव और मटनार बैराज परियोजनाएं, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना और गरियाबंद जिले की सिकासार–कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं।

इसके अलावा अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जिससे करीब 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी। बैठक में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र और समक्का बैराज से जुड़े अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा हुई और ठोस प्रयास करने पर सहमति बनी।

इस बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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