कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी चुनाव, भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर प्रवास के दौरान भाजपा, आरएसएस और राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी।
महंगाई और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बिजली दरों और खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार जवाब देने से बच रही है। उनका आरोप है कि किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है और बाजार में ऊंचे दामों पर खाद बेची जा रही है।
उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, तब तेल कंपनियों के नुकसान की बात सामने रखी जाती थी, लेकिन अब कीमतें कम होने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल रही है। बघेल ने दावा किया कि सरकार के संरक्षण में खाद की कालाबाजारी हो रही है और किसानों से अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है।
बिजली दर, कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को अनुचित बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम जनता और किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना था कि स्कूल खुलने के बाद भी कई जगहों पर विद्यार्थियों को ड्रेस, किताबें और अन्य आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी संसाधनों की कमी बनी हुई है।
सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का दावा
भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस संगठन और विधानसभा दोनों स्तरों पर नेतृत्व की जिम्मेदारियां तय हैं तथा पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है और किसानों, युवाओं तथा आम नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगी।
उन्होंने जल जीवन मिशन के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में लोगों को अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बघेल ने दावा किया कि जमीनी स्थिति और सरकारी दावों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।





