सरेंडर के बाद नक्सली लीडर का कबूलनामा: 17 साल की उम्र में उठाई बंदूक, 30 साल तक रहा संगठन में, अब मांगी माफी

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे सरेंडर नक्सली लीडर पापाराव ने अपने अतीत को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह महज 17-18 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ा और करीब तीन दशक तक सक्रिय रहा। इस दौरान वह संगठन में ऊंचे पदों तक पहुंचा और कई बड़ी घटनाओं से उसका नाम जुड़ा।
पापाराव ने स्वीकार किया कि वह एक साधारण ग्रामीण जीवन जी रहा था, लेकिन परिस्थितियों और दबाव के कारण नक्सल संगठन में शामिल हो गया। उसने बताया कि उस समय गांवों में सरकारी दबाव, जबरन काम और मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं, जिससे वह प्रभावित हुआ और संगठन में भर्ती हो गया।
उसने यह भी कहा कि संगठन में शामिल होने के बाद उसका जीवन पूरी तरह बदल गया और वह धीरे-धीरे एक बड़े नक्सली लीडर के रूप में सामने आया। पापाराव ने माना कि नक्सलवाद का रास्ता गलत था और अब वह उन परिवारों से माफी मांगना चाहता है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया।
संगठन की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए उसने बताया कि हमले करने से पहले पूरी योजना बनाई जाती थी। पुलिस और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखकर IED ब्लास्ट और हमलों को अंजाम दिया जाता था। हथियारों के बारे में उसने बताया कि ज्यादातर हथियार पुलिस से लूटे गए थे।
आर्थिक स्थिति पर उसने कहा कि संगठन उतना मजबूत नहीं था, जितना बाहर से दिखता है। जरूरत की चीजें स्थानीय लोगों से ली जाती थीं और पैसे जंगल में छिपाकर रखे जाते थे।
नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ने के कारणों पर उसने बताया कि लगातार सुरक्षा बलों की कार्रवाई, बड़े नेताओं के मारे जाने और आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं से संगठन कमजोर हो गया। इसी वजह से उसने भी आत्मसमर्पण का फैसला लिया।
पापाराव ने कहा कि अब वह सामान्य जीवन जीना चाहता है और समाज के साथ मिलकर काम करेगा। उसने साफ किया कि वह दोबारा हथियार नहीं उठाएगा, बल्कि जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करेगा।





