memorandum: हिंदू संगठनों का कड़ा रुख, गरियाबंद मामले में ‘सांप्रदायिक कार्ड’ खेलने वालों पर कार्रवाई की मांग…..
जिलाधीश को ज्ञापन सौंपकर कहा- "साजिश के तहत सरकार और प्रशासन को किया जा रहा बदनाम

गरियाबंद जिले के दुल्काइयां ग्राम में घटित हालिया विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। (memorandum) बिलासपुर में आज विभिन्न हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा और गरियाबंद की घटनाओं को ‘सांप्रदायिक दंगा’ बताकर किए जा रहे दुष्प्रचार पर गहरी नाराजगी जाहिर की।
संगठनों का आरोप है कि कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपनी करतूतों को छिपाने के लिए इसे मजहबी रंग दे रहे हैं और जानबूझकर राज्य सरकार व पुलिस प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह सांप्रदायिक विवाद नहीं, बल्कि हिंदू समाज की आस्था के केंद्रों पर किया गया सुनियोजित हमला है, जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है..
हिंदू संगठनों का कड़ा रुख, (memorandum)
हिंदू संगठनों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया कि दुल्काइयां ग्राम में लंबे समय से एक विशेष समुदाय के कुछ चिन्हित लोगों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। संगठनों का दावा है कि प्राचीन शिव मंदिर को क्षतिग्रस्त करने, मंदिर परिसर की पवित्रता भंग करने और साहू समाज के भवन सहित सरकारी गोठान व रावण भाटा की भूमि पर अवैध कब्जा करने जैसी घटनाएं सिलसिलेवार तरीके से की गई हैं।
ज्ञापन में बताया गया है कि इन मामलों के आरोपी जब जमानत पर बाहर आए, तो उन्होंने गवाहों के साथ लाठी-रॉड और चाकू से मारपीट की और दहशत फैलाने के लिए इसका वीडियो भी वायरल किया। संगठनों का तर्क है कि जब प्रशासन इन अपराधियों पर कार्रवाई करता है, तो इसे ‘अल्पसंख्यक विरोध’ का नाम देकर समाज में वैमनस्य फैलाया जाता है, जो पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है….
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिंदू संगठनों ने प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि दुल्काइयां ग्राम के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तथ्यात्मक जांच कराई जाए और दोषियों के आर्थिक स्रोतों व संपत्तियों का ब्यौरा खंगाला जाए। इसके साथ ही मंदिर, साहू भवन और गोठान भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने और गवाहों को धमकाने वालों पर रासुका जैसी कठोर कार्रवाई की मांग की गई है……





