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5 मई को खुलेगा मंडीपखोल गुफा, जानिए साल में एक बार खुलने की क्या है मान्यता

 रायपुर। मंडीपखोल नाम दो शब्दों से बना है- मंडी और खोल.. जिसमें मंडी यानी कि मेला और खोल यानी कि गुफा होती है…ये एशिया का दुसरा बड़ा गुफा है.. जो खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले से लगभग 80 किलोमीटर दूर मैकल पर्वतमाला में स्थित है.. ये गुफा हर साल अक्षय तृतीया के बाद पहले सोमवार को खुलता है.. वहीं इस बार ये गुफा 5 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुलेगी… और इस दिन यहां एक भव्य मेले का भी आयोजन होगा..

वहीं  इस गुफा में महादेव का मंदिर भी है.. जो मंदिर साल में एक बार खुलता है… यहां जाने के लिए लोगों 16 नदियों को पार कर के जाना पड़ता है…. इसके अलावा मंडीप खोल गुफा को लेकर कई रियासत कालीन मान्यताएं हैं.. इसे ठाकुरटोला के जमींदार अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले सोमवार को केवल एक दिन के लिए खोलते हैं… इसके बाद विधिवत पूजा अर्चना करते हैं। चट्टान हटाने के बाद जंगली जानवरों से बचाव के लिए पहले हवाई फायर भी किया जाता है.. इसके अलावा गुफा में पहला प्रवेश जमींदार परिवार के लोग ही करते हैं.. और वहां स्थित शिवलिंग सहित अन्य देवी देवताओं की विधि विधान से पूजा अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं..

इसके अलावा मंडीप खोल गुफा के कई रहस्य भी हैं.. और यहां की यात्रा भी काफी रोमांचकारी होती है। इस चिलचिलाती गर्मी में भी गुफा के अंदर शीतलता होती है… सकरे मुख वाली इस गुफा के अंदर कई बड़े कक्ष हैं.. कुछ साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा इस गुफा का सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें यह पाया गया कि यह गुफा देश की सबसे लंबी और एशिया की दूसरी सबसे लंबी गुफा है… जिसके इतिहास में काफी रहस्य छिपे हुए हैं..खैर इन पर अभी अनुसंधान होना बाकी है..

वहीं मंडीप खोल गुफा मैकल पर्वत माला के खूबसूरत हिस्से में स्थित है.. लेकिन यहां पहुंचना सरल नहीं है क्योंकि गुफा तक पहुंचने का कोई स्थाई रास्ता नहीं है.. पैलीमेटा या ठाकुरटोला तक ही सड़क मार्ग मौजूद है। इसके बाद भक्तों को घोर जंगल से होते हुए पगडंडियों की सहायता से पहाड़ों को पार करते हुए रास्ते में पड़ने वाली नदी और नालों को भी पार करना पड़ता है.. गुफा के पास स्थित कुंड से निकलने वाली श्वेत गंगा को श्रद्धालु रास्ते में 16 बार पार करते हैं और बाबा भोलेनाथ के दर्शन पाते हैं..

इसके अलावा ये स्थान अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है… जिस पर कई रिसर्च पर भी हुए हैं.. इस गुफा का नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन और इटालियन केव रिसर्च ग्रुप ने एक विस्तृत अध्ययन किया है…जिस के मुताबिक, गुफा में कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। इनमें पूंछ वाले चमगादड़, ब्लैंडफोर्ड रॉक अगामा, विभिन्न प्रजातियों की मकड़ियां, पिल बग और मेंढक शामिल हैं… ये जीव सूर्य की रोशनी के बिना एक विशिष्ट खाद्य श्रृंखला का हिस्सा हैं..

इसके अलावा यहां श्रद्धालुओं की अधिक संख्या से गुफा का तापमान बढ़ जाता है.. जिससे कई जीव अस्थायी रूप से गुफा के भीतरी हिस्सों में चले जाते हैं…यही कारण है कि प्राचीन काल से इस गुफा को साल में केवल एक दिन खोलने की परंपरा है.. जिससे गुफा का प्राकृतिक इकोसिस्टम संरक्षित रहता है..

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