केरल चुनाव से पहले वाम सरकार का अयप्पा दांव, सबरीमाला में 20 सितंबर से ग्लोबल अयप्पा संगमम
पहली बार हिंदू बने सियासत का सेंटर पॉइंट

दिल्ली। केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और पहली बार हिंदू राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। वामपंथी सरकार सीपीआई (एम), जिसे आमतौर पर नास्तिक विचारधारा वाला माना जाता है, इस बार भगवान अय्यपा के नाम पर बड़ा आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 20 सितंबर से सबरीमाला की तलहटी में बसे पंपा में तीन दिवसीय ग्लोबल अयप्पा संगमम का आयोजन घोषित किया है। इसमें विभिन्न संप्रदायों के संतों और सभी जातियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2018 के सबरीमाला विवाद में खोए हिंदू वोट वापस पाने के लिए यह पहल की गई है। निचली जाति और ओबीसी वोट परंपरागत रूप से वाम दलों के साथ रहे हैं, लेकिन उच्च जाति के हिंदुओं का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि वाम दल अब ऊंची जातियों को साधने की कोशिश कर रहा है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे पाखंड करार दिया है। वहीं, हिंदू संगठनों और विहिप ने इसे असंवैधानिक बताया।
राज्य की राजनीति में भगवान अय्यपा का असर हमेशा से बड़ा रहा है। सबरीमाला मंदिर दक्षिण भारत का प्रमुख तीर्थ है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीपीआईएम अपने अल्पसंख्यक वोटों को नाराज किए बिना हिंदू वोटों को फिर से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि यह कदम जोखिमभरा भी हो सकता है।
2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं के प्रवेश को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था, जिसका असर चुनावी नतीजों में दिखा। यही वजह है कि विजयन अब डीएमके मॉडल की तरह धार्मिक भावनाओं से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। सबरीमाला सम्मेलन इसी दिशा का हिस्सा माना जा रहा है।





