जानिए क्या है लाल बंगले वाली कुटिया….

रायपुर। आज आपको छत्तीसगढ़ की एक ऐसी जनजाति के बारे में बताते हैं जिनके घरों के बाहर बने लाल बंगले नामक कुटिया में बाहरी तो छोड़ो..उनकी खुद की बेटियां भी नहीं जा सकती… और गलती से कोई बाहरी इंसान इस कुटिया को छु भी दे तो ये लोग इसे तोड़ देते हैं..या जला देते हैं… मैं बात कर रही हुं भुंजिया आदिवासी जनजाति की..
यह बंगला महिलाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ये अपने लाल बंगले में ही खाना पकाते और खाते हैं। महिलाऐं लाल बंगले के आस-पास ही खाना खाती हैं, बंगले से दूर नहीं खाती हैं। ये महिलाएं अन्य समुदाय में भी खाना-पीना नहीं खाती हैं। चोकोटिया भुंजिया जनजाति में ही लाल बंगला बनाने का रीति-रिवाज है ।
भुंजिया जनजाति में तीन उपजातियाँ हैं – 1. चोकोटिया भुंजिया जनजाति, 2. खोलारझीया भुंजिया जनजाति, और 3. चिन्डा भुंजिया जनजाति । चोकोटिया भुंजिया जनजाति में लाल बंगला बनाने का रिवाज है। यह एक खास कमरा (रूम) है, जो उनकी आस्था से जुड़ा हुआ है। भुंजिया जनजाति के लोग इस लाल बंगले को अपने इष्ट देवी-देवताओं का पवित्र स्थान मानते हैं। इस समुदाय के लोग लाल बंगला को ऊँचाई में अक्सर छोटा ही बनाते हैं। इसे बनाने के लिए छीन्द (खजूर), बांस, खड़ (खादर), लकड़ी इत्यादि का प्रयोग करते हैं।
चोकोटिया भुंजिया समुदाय के लोग अपने घरों के साथ अलग से एक छोटा-सा घर बनाते हैं, जिसको लाल रंग दिया जाता है। इस ख़ास घर को लाल बंगला कहते हैं। ये लाल बंगला का उपयोग रसोई के लिये करते हैं।
किसी दूसरी जनजाति या अन्य किसी भी समुदाय के लोग लाल बंगले में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। इसका कारण है कि भुंजिया समुदाय के लोग अपने लाल बंगले में इष्ट देवी-देवता, कुलदेवी की पूजा-अर्चना करते हैं और वे इसे अपना पवित्र स्थान मानते हैं। लाल बंगला इस समुदाय के हर परिवार में होता है क्योंकि इनके पूर्वजों का मानना है कि यह इनकी प्रमुख पहचान है जो एक अनूठी परम्परा को कायम रखती है।
लाल बंगले में यदि कोई दूसरी जाति के व्यक्ति प्रवेश कर जाए या स्पर्श कर ले तो वे लाल बंगले को आग से जला देते हैं। लाल बंगले को जलाने के बाद प्रवेश या स्पर्श करने वाले व्यक्ति द्वारा लाल बंगले का निर्माण कराया जाता है, यदि वह व्यक्ति बनाने के लिए तैयार नहीं होता है तो भुंजिया समुदाय के लोग इसे स्वयं बनाते हैं, और नए लाल बंगला के निर्माण होते तक वे अन्न व जल ग्रहण नहीं करते हैं। परिवार के सभी सदस्य लाल बंगला के निर्माण पूरा होने के बाद ही अन्न व जल ग्रहण करते हैं।





