Investigation Report: गतौरा रेल हादसे की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल- लोको पायलट यूनियन ने कहा रिपोर्ट अनुचित
Investigation Report: लोको पायलट को दोषी ठहराने पर हंगामा यूनियन बोली, रेलवे ने जल्दबाजी में दी रिपोर्ट

गतौरा रेल हादसे की जांच रिपोर्ट पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।(Investigation Report) लोको पायलट यूनियन और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन पर आरोप लगाया है कि बिना पूरी जांच किए मृत लोको पायलट को दोषी ठहराया जा रहा है।
गतौरा हादसे में तकनीकी खराबी की आशंका, यूनियन ने दी जांच दोबारा कराने की मांग.
गतौरा रेल दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है।ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन एआईएलआरएसए ने रिपोर्ट को पूर्वाग्रहपूर्ण और तथ्यहीन बताया है। यूनियन का कहना है कि जांच में कई तथ्यात्मक त्रुटियाँ हैं और रिपोर्ट में गलत तकनीकी आंकड़े दर्ज किए गए हैं।एआईएलआरएसए के जोनल महासचिव वी.के. तिवारी के अनुसार यह रिपोर्ट केवल चालक दल पर दोष मढ़ने के लिए तैयार की गई है, ताकि रेलवे प्रशासन की कमियों को छिपाया जा सके।
मृत चालक पर दोष थोपना अमानवीय- विधायक अटल श्रीवास्तव(Investigation Report)
उनका कहना है। की हमारा संगठन बिना निष्पक्ष जांच के किसी को दोषी ठहराने का विरोध करता है। यह रिपोर्ट जल्दबाजी में बनाई गई है।वहीं एआईएलआरएसए के अन्य सदस्यो के अनुसार स्पीड फ्लो चार्ट खुद बताता है कि मेमू ट्रेन चालक दल ने पहले सिग्नल को 42 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया था।
लोको पायलट यूनियन बोली- सच्चाई को मोड़ने की कोशिश कर रहा रेलवे प्रशासन
अगर सिग्नल लाल होता, तो गति 73 किमी प्रति घंटे तक क्यों बढ़ाई जाती? इससे साफ है कि सिग्नल हरा था और तकनीकी खराबी के कारण हादसा हुआ। उन्होंने दावा किया कि टक्कर से पहले चालक दल ने आपातकालीन ब्रेक लगाए, जो फ्लो चार्ट में स्पष्ट दिखता है।
यूनियन ने दी जांच दोबारा कराने की मांग
यूनियन का कहना है कि जब तक रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, किसी को भी दोषी ठहराना अनुचित है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुवे कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने जल्दबाजी में मृत लोको पायलट को जिम्मेदार ठहराया है। परिवार अभी सदमे में है और इतनी जल्दी निष्कर्ष देना अमानवीय है। हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।अब सवाल यही है। क्या यह रिपोर्ट सच्चाई बयां करती है या किसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है? सच्चाई तो सीआरएस की अंतिम जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगी।





