नियम बदले तो पुराना एडमिशन अमान्य, मेडिकल पीजी सीटों पर नई काउंसलिंग का आदेश

छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में हुए पुराने सीट अलॉटमेंट को रद्द कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमों में बदलाव होने के बाद पहले से दिया गया एडमिशन मान्य नहीं माना जाएगा। अब सभी सीटों पर नए नियमों के तहत दोबारा काउंसलिंग कराई जाएगी।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि वर्ष 2025 के नियम 11 में संशोधन के बाद किसी भी अभ्यर्थी को पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अब कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।

मामला भिलाई निवासी एक अभ्यर्थी की याचिका से जुड़ा था, जिसमें राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2026 में की गई काउंसलिंग और सीट आवंटन रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने मेरिट के आधार पर निजी मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस की सीट प्राप्त की थी और फीस व बैंक गारंटी जमा कर जॉइन भी कर लिया था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि एक बार प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे रद्द करना गलत और मनमाना है। इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लिया गया है और डोमिसाइल आधारित आरक्षण को असंवैधानिक मानते हुए नियमों में बदलाव किया गया है।

सरकार ने बताया कि नए नियमों के तहत 50 प्रतिशत सीटें छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक जांच और नियमों के अधीन हो, तब प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम नहीं माना जा सकता।

इस फैसले के बाद अब राज्य में मेडिकल पीजी सीटों पर नए नियमों के अनुसार नई काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

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