बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में आज शामिल होंगे गृहमंत्री अमित शाह, जनजातीय नेताओं से करेंगे संवाद

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के विशेष आयोजन मुरिया दरबार में आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे। इस दरबार में वे 80 परगनाओं से आए मांझी-मुखियाओं और जनजातीय प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई केंद्रीय गृहमंत्री इस पारंपरिक जनजातीय दरबार में हिस्सा लेगा। शाह का यह दौरा बस्तर में पिछले 22 महीनों में छठा प्रवास होगा।

बस्तर दशहरा की यह परंपरा करीब 145 साल पुरानी है और जनजातीय एकता का प्रतीक मानी जाती है। अमित शाह की मौजूदगी इस आयोजन को ऐतिहासिक बना रही है। वे इस दौरान न सिर्फ जनजातीय समाज की समस्याएं सुनेंगे बल्कि सरकार की विकास योजनाओं और माओवाद उन्मूलन अभियान से जुड़े संदेश भी देंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री ने पहले ही माओवाद के खात्मे की समयसीमा मार्च 2026 तय कर दी है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा एजेंसियों ने बस्तर के कई इलाकों में प्रभावी अभियान चलाकर माओवादियों को पीछे धकेला है। शाह कई बार साफ कर चुके हैं कि समर्पण ही उनका एकमात्र विकल्प है, अन्यथा सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

शाह इससे पहले अप्रैल 2025 में दंतेवाड़ा में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ मेले में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने आदिवासी संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। आज वे उसी भाव के साथ बस्तर दशहरा में सनातन आस्था और जनजातीय परंपरा के इस अद्वितीय संगम में शामिल होंगे।

बस्तर दशहरा का मुरिया दरबार 1876 के ऐतिहासिक मुरिया विद्रोह से जुड़ा है, जब झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में जनजातियों ने अंग्रेजों के शासन और अत्याचार के खिलाफ आंदोलन किया था। तब से यह दरबार जनजातीय अधिकार और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया।

अमित शाह के इस दौरे से न केवल बस्तर की सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि केंद्र सरकार का माओवादी क्षेत्रों में विकास और संवाद का संदेश भी मजबूती से जाएगा।

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