अपील में देरी पर हाई कोर्ट का मानवीय रुख, अधिवक्ता को अंधाश्रम में सेवा का दिया सुझाव

ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने अपील दायर करने में हुई देरी के एक मामले में मानवीय और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। अदालत ने देरी को माफ करते हुए अधिवक्ता को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर देने का सुझाव दिया।
कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता माधव अंधाश्रम, ग्वालियर जाकर दिव्यांग बच्चों और वहां रह रहे लोगों के साथ एक घंटे का समय बिताएं और लगभग 3,500 रुपये के खाद्य पदार्थ साथ ले जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोई दंड नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश है।
अधिवक्ता ने अदालत के इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार करते हुए 15 दिनों के भीतर आश्रम जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद अपील को पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा।
मामले में अपील दायर करने में 156 दिनों की देरी हुई थी। अदालत ने माना कि यह देरी तकनीकी कारणों और अनजानी भूल के चलते हुई, न कि जानबूझकर। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिवक्ता की गलती के कारण पक्षकार को नुकसान नहीं होना चाहिए।
इस आदेश की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और किशोर न्याय समिति को भी भेजी जाएगी। अदालत के इस फैसले को न्याय के साथ मानवीय मूल्यों को जोड़ने वाला कदम माना जा रहा है।





