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होटल में पुलिस की अवैध कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, संचालक को मुआवजा देने का आदेश

दुर्ग जिले के एक होटल में पुलिस द्वारा की गई कथित अवैध कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने होटल संचालक की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए राज्य सरकार को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। साथ ही दोषी अधिकारियों से यह राशि वसूलने की छूट भी दी गई है।

मामला भिलाई क्षेत्र के कोहका स्थित एक होटल से जुड़ा है, जहां पुलिस गुमशुदा लड़की की तलाश के नाम पर बिना अनुमति होटल में घुस गई थी। पुलिस ने वहां ठहरे लोगों को कमरों से बाहर निकाला और होटल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोप है कि बाद में होटल मालिक के साथ मारपीट कर बिना एफआईआर के जेल भेज दिया गया।

होटल संचालक आकाश कुमार साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया था। उन्होंने कहा कि उनका होटल विधिवत पंजीकृत है और सभी वैधानिक अनुमति के साथ संचालित हो रहा है। इसके बावजूद पुलिस ने नियमों का पालन किए बिना कार्रवाई की।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज नहीं थी। केवल संदेह और कहासुनी के आधार पर गिरफ्तारी करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में दिया गया मानसिक तनाव और अपमान मानवीय गरिमा के खिलाफ है।

कोर्ट ने पुलिस के साथ-साथ संबंधित एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा गया कि मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी की भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बिना उचित जांच के पुलिस रिपोर्ट पर मुहर लगा दी।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया और चार सप्ताह के भीतर मुआवजा देने का आदेश दिया है। भुगतान में देरी होने पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। गृह विभाग को निर्देश दिया गया है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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