अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, लीज क्षेत्र के बाहर उत्खनन पर तत्काल रोक

छत्तीसगढ़ में अवैध खनन के मामले पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए लीज क्षेत्र के बाहर हो रहे उत्खनन पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने खनिज विभाग के सचिव से इस मामले में व्यक्तिगत शपथ पत्र भी मांगा है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर हो गई है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
याचिका में बताया गया कि फ्लैग स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी, लेकिन लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से कई गुना अधिक जमीन पर कब्जा कर खनन शुरू कर दिया। खनन से निकलने वाला मलबा और पत्थर महानदी में डाला जा रहा है, जिससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरणीय अनुमति समाप्त होने के बावजूद क्षेत्र में अवैध ब्लास्टिंग और उत्खनन जारी है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया है। इन पर पर्यावरणीय अनुमति के बिना खनन करने के कारण 30 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है।
हाईकोर्ट ने खनिज विभाग के सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा है कि महानदी में माइनिंग वेस्ट फेंकने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई लीजधारक इस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर करता है, तो उसे इसी मामले के साथ जोड़ा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई तय तारीख पर की जाएगी।





