भतीजी से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने घटाई सजा, आजीवन कारावास की जगह 10 साल कैद

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भतीजी से दुष्कर्म के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी चाचा को पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे घटाकर 10 साल का सश्रम कारावास कर दिया।

दरअसल, पीड़िता ने शिकायत में कहा था कि माता-पिता के अलग होने के बाद 5 दिसंबर 2018 को उसके चाचा ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इस घटना की जानकारी उसने अपनी मौसी को दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और आरोपी गिरफ्तार हुआ।

ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता को नाबालिग मानते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। स्कूल रजिस्टर और मां के बयान में उम्र 14 साल बताई गई थी, लेकिन स्कूल की प्रधानाचार्य ने रजिस्टर की प्रामाणिकता पर संदेह जताया।

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने कहा कि सबूतों के आधार पर पीड़िता की उम्र साबित नहीं हुई, इसलिए पॉक्सो एक्ट लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को बरकरार रखते हुए सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत 10 साल का सश्रम कारावास तय किया।

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