फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति हाईकोर्ट ने की रद्द

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद पर की गई नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार को सीधे रजिस्ट्रार नियुक्त करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि कानून के अनुसार यह अधिकार काउंसिल के पास होता है।

दरअसल, डॉ. राकेश गुप्ता ने याचिका दायर कर राज्य सरकार के 14 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत स्टोर कीपर अश्वनी गुरडेकर को छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद का प्रभार दिया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि Pharmacy Act, 1948 की धारा 26 के अनुसार रजिस्ट्रार की नियुक्ति राज्य फार्मेसी काउंसिल द्वारा की जानी चाहिए और इसके लिए केवल राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है। लेकिन इस मामले में राज्य सरकार ने सीधे आदेश जारी कर दिया, जो कानून के प्रावधानों के विपरीत है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति या प्रभार देने से पहले काउंसिल की ओर से कोई प्रस्ताव या निर्णय लिया गया हो, ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब कानून किसी कार्य को करने का एक निश्चित तरीका तय करता है, तो उसी तरीके का पालन किया जाना चाहिए।

पात्रता पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अश्वनी गुरडेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल (मेकाहारा) में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत हैं और रजिस्ट्रार पद के लिए निर्धारित पात्रता भी पूरी नहीं करते।

कोर्ट ने राज्य सरकार के 14 मार्च 2024 के आदेश को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया और सरकार तथा संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति की नई प्रक्रिया कानून के अनुसार शुरू की जाए।

नई प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि फार्मेसी काउंसिल चाहें तो Pharmacy Act, 1948 और संबंधित नियमों के तहत नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि में रजिस्ट्रार पद की पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। फार्मेसी काउंसिल के कई सदस्यों ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।

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