GBS सिंड्रोम; महाराष्ट्र में 33 दिन में मिले 197 संदिग्ध,7 की हुई मौत

मुंबई। महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का पहला मामला 9 जनवरी को सामने आया था। 12 फरवरी तक, 33 दिन में 197 संदिग्ध मरीज पाए गए हैं, जिनमें से 172 मरीजों में इस सिंड्रोम की पुष्टि हो चुकी है। इस दौरान 7 मरीजों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 50 साल से ऊपर के 3 मरीज और 40 साल या उससे कम के 4 मरीज शामिल हैं। फिलहाल, 50 मरीज ICU में और 20 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
सबसे ज्यादा मामले पुणे और नांदेड़ से
पुणे नगर निगम से 40 मरीज पाए गए हैं और आसपास के गांवों से 92 मरीज हैं। नांदेड़ में इस सिंड्रोम के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं, जहां एक हाउसिंग सोसाइटी से प्रभावित मरीजों का आंकड़ा बढ़ा है। पानी के सैंपल में कैंपिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया पाया गया, जो इस सिंड्रोम का कारण माना जा रहा है।
इन राज्यों में भी जीबीएस के केस
- तेलंगाना
- असम
- पश्चिम बंगाल
- राजस्थान
एक इंजेक्शन आता है 20 हजार रुपए का
GBS का इलाज महंगा है। एक इंजेक्शन की कीमत 20,000 रुपये तक है। डॉक्टरों के अनुसार, GBS के ज्यादातर मरीज 6 महीने में बिना किसी सपोर्ट के चलने-फिरने लगते हैं, लेकिन कुछ मामलों में एक साल या उससे ज्यादा समय भी लग सकता है।





