सहकारिता आंदोलन से लेकर डिप्टी सीएम तक… कौन थे अजित पवार जिनके हाथ में हरदम रहा ‘पावर’

दिल्ली/पुणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बुधवार सुबह प्लेन क्रैश में मौत हो गई। यह हादसा पुणे जिले के बारामती इलाके में उस वक्त हुआ, जब उनका विमान लैंडिंग के लिए रनवे पर उतर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटना में अजित पवार समेत चार लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद पूरे राज्य की राजनीति में शोक की लहर है, वहीं बारामती से सामने आए वीडियो में विमान के जलने और धुएं का गुबार उठने की तस्वीरें भी दिखाई दे रही हैं।
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में वह नाम थे, जिनके फैसले सत्ता के समीकरण बदलने की ताकत रखते थे। उन्हें राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उनकी पहचान ‘कठोर प्रशासक’ और ‘पावरफुल रणनीतिकार’ के रूप में बनी। वे लंबे समय तक सहकारिता आंदोलन से जुड़े रहे, जो महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति और आर्थिक ढांचे की रीढ़ माना जाता है। यही अनुभव बाद में उनकी राजनीति का आधार बना।
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था। वे एनसीपी संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे। साल 1991 में उन्होंने बारामती से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और इसके बाद इस सीट को अपना अभेद्य किला बना लिया। बारामती से लगातार जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ दिलाई।
वक्त के साथ अजित पवार सत्ता के केंद्र में आते गए। उन्होंने संगठन, सरकार और चुनावी रणनीति—तीनों में अपनी मजबूत भूमिका बनाई। समर्थकों के लिए वे ‘काम कराने वाले नेता’ थे, तो विरोधियों के लिए ‘सख्त और निर्णायक खिलाड़ी’। उपमुख्यमंत्री के तौर पर वे सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते थे। आज जिस बारामती ने उन्हें सबसे बड़ा जनाधार दिया, वहीं उनका अंतिम सफर भी खत्म हो गया।





