देश की पहली कृषि कैबिनेट में ₹27,746 करोड़ की मंजूरी, किसानों के हित में बड़े फैसले

देश की पहली कृषि कैबिनेट मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के नांगलवाड़ी में आयोजित की गई, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में किसानों के हित में बड़े फैसले लिए गए। इस ऐतिहासिक बैठक में कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी और सहकारिता से जुड़ी योजनाओं के लिए कुल 27,746 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में कृषि क्षेत्र से संबंधित 25,678 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई, जबकि नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक में दो सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2067.97 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इन योजनाओं से प्रदेश में कृषि उत्पादन, सिंचाई सुविधाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
देश की पहली कृषि कैबिनेट में पशु स्वास्थ्य अधोसंरचना के लिए 610.51 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिससे अगले पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सालयों और भवनों का विकास किया जाएगा।
मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्ययोग नीति 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत अगले तीन वर्षों में 3000 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 20 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है। इसके लिए 18.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान स्वीकृत किया गया।
मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, बीज संवर्धन और ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन के तहत 1150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे कृषि दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत 1375 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी, जिससे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय और तकनीकी सहयोग मिलेगा। उद्यानिकी क्षेत्र में पौधशालाओं के विकास के लिए 1738.94 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सहकारिता विभाग के माध्यम से किसानों को अल्पकालीन फसल ऋण पर ब्याज अनुदान के लिए 3909 करोड़ रुपये और सहकारी बैंकों की अंशपूंजी सहायता के लिए 1975 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के लिए 656 करोड़ रुपये और पशुपालन एवं डेयरी से जुड़ी योजनाओं के लिए 6518 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
नर्मदा नदी से जुड़ी दो माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं के तहत वरला और पानसेमल तहसीलों के कुल 86 गांवों की 38 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन परियोजनाओं की कुल लागत 2067.97 करोड़ रुपये है।
देश की पहली कृषि कैबिनेट को किसान कल्याण वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि आगामी वर्षों में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया जाएगा, ताकि किसानों के हित में ठोस निर्णय लिए जा सकें।





