बस्तर में नक्सलियों का नया निशाना बने शिक्षित युवा, डर के साये में गांव छोड़ने को मजबूर

बस्तर संभाग में नक्सली अब पढ़े-लिखे युवाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल गहरा गया है। स्थिति यह है कि कई गांवों में शिक्षित युवा शाम होते ही अपने घर छोड़कर थाने या सुरक्षा कैंप के आसपास रात गुजारने को मजबूर हैं, ताकि अपनी जान बचा सकें।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों के कई गांवों में यह स्थिति देखने को मिल रही है। पढ़ाई करने, नौकरी की तैयारी करने या सरकारी योजनाओं से जुड़े युवाओं को नक्सली शक की नजर से देखते हैं और उन्हें पुलिस का मुखबिर मानने का खतरा बना रहता है। यही संदेह कई बार धमकी और हिंसा में बदल जाता है।
पिछले सात महीनों में नक्सलियों ने पांच युवाओं की हत्या की है। इनमें शिक्षादूत और छात्र भी शामिल हैं, जिन्हें पुलिस मुखबिरी के शक में मार दिया गया। कई मामलों में अपहरण के बाद हत्या की घटनाएं सामने आई हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नक्सलियों के निशाने पर हैं। कई गांवों में पंचायत स्तर के प्रतिनिधि अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और रात के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग थानों या कैंप के पास बने भवनों में शरण लेते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नक्सली अब भी गांवों में छिपकर रहते हैं और रात में सक्रिय हो जाते हैं। जंगल और पहाड़ी इलाकों में उनकी मौजूदगी बनी हुई है, जिससे लोगों में डर बना रहता है।
इस माहौल का असर युवाओं की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है। कई लोग अपनी नौकरी छोड़ने या गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कुछ युवाओं ने बताया कि वे परिवार से मिलने भी छिपकर आते हैं और रात होने से पहले सुरक्षित स्थानों पर लौट जाते हैं।
सुरक्षा बलों के अनुसार क्षेत्र में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और नक्सली गतिविधियों में कमी आई है। पुलिस और प्रशासन द्वारा गश्त, खुफिया तंत्र और जनसंवाद के जरिए हालात सुधारने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पूरी तरह शांति स्थापित होने में अभी समय लगेगा।
इधर, पद्मश्री से सम्मानित एक स्थानीय वैद्य को भी नक्सलियों से धमकी मिलने के बाद गांव छोड़ना पड़ा है। वे फिलहाल सुरक्षा के बीच जिला मुख्यालय में रह रहे हैं और वहीं लोगों का इलाज कर रहे हैं।





