कैंसर की शुरुआती पहचान से बच सकती है जान, लक्षण और रोकथाम के तरीकों को जानना जरूरी

कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी से होने वाली अधिकतर मौतों का कारण समय पर पहचान न हो पाना है। यदि कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की मदद से इलाज संभव है और मरीज की जान बचाई जा सकती है।
कैंसर की शुरुआत शरीर के भीतर धीरे-धीरे होती है। पहले चरण को प्रारंभिक अवस्था कहा जाता है, जिसे दो भागों में समझा जाता है। पहले उप-चरण में कैंसर की गांठ छोटी होती है और अपने मूल अंग तक ही सीमित रहती है। दूसरे उप-चरण में कोशिकाओं का आकार बढ़ने लगता है और कुछ मामलों में इसके अन्य अंगों की ओर फैलने की संभावना बनने लगती है। इस अवस्था में सर्जरी के जरिए प्रभावित हिस्से को निकालना प्रभावी माना जाता है। इसके साथ कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी दी जाती है।
दूसरे चरण में कैंसर ज्यादा गंभीर हो जाता है। इस दौरान कैंसर कोशिकाएं आसपास के अंगों और लिम्फ नोड्स तक पहुंच सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में पहले सर्जरी की जाती है और उसके बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी या रेडिएशन का सहारा लिया जाता है।
कैंसर के सौ से अधिक प्रकार होते हैं, इसलिए इसकी पहचान के लिए अलग-अलग जांच तकनीकों का उपयोग किया जाता है। बायोप्सी के जरिए प्रभावित ऊतक की जांच की जाती है। स्तन कैंसर की पहचान के लिए मेमोग्राम किया जाता है, जबकि ब्रेन ट्यूमर और आंतरिक गांठों का पता लगाने के लिए एमआरआई जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर अब पूरी तरह लाइलाज बीमारी नहीं रही है। जरूरी है कि शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न किया जाए। समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही, कुछ मामलों में क्लिनिकल ट्रायल भी मरीजों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।





