छत्तीसगढ़ के एकमात्र मानसिक चिकित्सालय में स्टाफ नियुक्ति में देरी, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

CG High Court :
छत्तीसगढ़ के एकमात्र मानसिक चिकित्सालय में मनोरोग विशेषज्ञों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने मुख्य सचिव को शपथपत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को याद दिलाया कि 22 अगस्त 2024 को जारी आदेश के बाद चार बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन अब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। अदालत ने सरकार की उदासीनता पर कड़ी टिप्पणी की, खासकर तब जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि 180 मरीजों की देखभाल के लिए केवल दो वार्ड बॉय तैनात हैं।
हाईकोर्ट ने स्वतसंज्ञान लिया, स्टाफ की कमी पर एक और याचिका दायर
मानसिक चिकित्सालय में स्टाफ की कमी को लेकर एक अन्य जनहित याचिका भी दायर की गई है, और दोनों याचिकाओं पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में एक साथ सुनवाई चल रही है। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने यह बताया था कि अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 200 करने की योजना है, जिसके तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा था कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, लेकिन अब तक इस प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।
मुख्य सचिव से शपथपत्र में दी गई जानकारी, भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी
22 अगस्त 2024 के आदेश के अनुपालन में मुख्य सचिव की ओर से पेश किए गए शपथपत्र में बताया गया था कि राज्य भर में वर्ग-III और वर्ग-IV के कुल 650 पदों पर भर्ती की जानी है, जिनमें मानसिक चिकित्सालय, सेंदरी के लिए भी नियुक्तियाँ शामिल हैं। हालांकि, बार-बार सुनवाई के बावजूद इस प्रक्रिया की पूर्णता की कोई ठोस जानकारी अदालत को नहीं दी गई है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर मानसिक चिकित्सालय के अधीक्षक प्रभु चौधरी ने कहा, “हमारे प्रयास जारी हैं, और सरकार के निर्देशों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जाएगी। हम अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।”





