यमन में भारतीय नर्स निमिषा की मौत की सजा रद्द, हाई लेवल मीटिंग में हुआ फैसला

दिल्ली। यमन में केरल की नर्स निमिषा प्रिया को मिली मौत की सजा रद्द कर दी गई है। यह फैसला यमन की राजधानी सना में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में लिया गया। इस जानकारी की पुष्टि भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने की है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

निमिषा (37 वर्ष) को 2018 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। उन्हें 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी थी, लेकिन एक दिन पहले ही सजा अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। इस मामले को धार्मिक वार्ता और शरिया कानून के आधार पर हल किया गया।

15 जुलाई को भारतीय मुफ्ती मुसलियार और यमन के सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज के बीच हुई बैठक में यमन सुप्रीम कोर्ट के जज और मृतक का भाई भी मौजूद थे। हालांकि, महदी का परिवार किसी भी माफी या ब्लड मनी के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे बदला लेकर रहेंगे।

निमिषा और महदी पहले एक क्लिनिक में साझेदार थे, लेकिन महदी द्वारा पासपोर्ट जब्त कर उत्पीड़न शुरू हुआ। 2017 में ड्रग ओवरडोज से महदी की मौत हुई, जिसके लिए निमिषा को दोषी ठहराया गया।

भारत के पास यमन में स्थायी दूतावास नहीं है, इसलिए रियाद स्थित भारतीय दूतावास के जरिए संपर्क साधा गया। सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने कहा था कि वह सीमित कदम ही उठा सकती है।

इस केस में सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल ने 10 लाख डॉलर की ब्लड मनी की पेशकश की थी, जिसे ठुकरा दिया गया था। अब सजा रद्द होने से निमिषा को राहत मिली है।

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