डायमंड जुबली जंबूरी पर खर्च को लेकर विवाद, जांच के आदेश

रायपुर (जसेरि)। भारत स्काउट एंड गाइड के 75वें वर्ष की डायमंड जुबली के मौके पर देश की पहली रेंजर–रोवर राष्ट्रीय जंबूरी छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दुगली में आयोजित की जा रही है। यह आयोजन अपने भव्य स्वरूप और बड़े पैमाने की तैयारियों के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पिछले दो महीनों से जंबूरी की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही थीं। इसके तहत बड़ी संख्या में टेंट, रहने की व्यवस्था, स्नानघर और शौचालय बनाए गए। हालांकि, अब इसी आयोजन में हुए खर्च को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

टेंट हाउस संचालकों ने आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था, जबकि टेंडर का अनुबंध 5 जनवरी 2026 को हुआ। इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक की गई, जिसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ को जांच के निर्देश मिले हैं। रायपुर संभाग के संचालक को 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।

शिकायत में बताया गया है कि करीब 400 अस्थायी शौचालय बनाए गए, जिन पर प्रति शौचालय 22 हजार रुपये खर्च दिखाया गया है। कुल खर्च लगभग 88 लाख रुपये बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इतनी राशि में स्थायी शौचालय बनाए जा सकते थे, जो ग्रामीणों और आम जनता के लंबे समय तक काम आते।

इसके अलावा, 16,200 स्काउट्स के लिए टेंट लगाने पर करीब 1.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि खाने-नाश्ते की व्यवस्था केवल 11,000 स्काउट्स के लिए बताई गई है। ऐसे में रुकने की व्यवस्था पर अधिक खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, केवल पांच दिन की अस्थायी व्यवस्था के लिए शौचालय, मूत्रालय और स्नानघर पर करीब 5 करोड़ 18 लाख रुपये का टेंडर किया गया, जबकि एक मद में 1 करोड़ 62 लाख रुपये चार्ज किए गए।

यह मामला सांसद बृजमोहन अग्रवाल तक भी पहुंचा। उन्होंने जनता के पैसों की कथित बर्बादी को लेकर आवाज उठाई और लापरवाही व विसंगतियों की जांच की मांग की। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी तय करना और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाना है।

वहीं दूसरी ओर, बालोद के दुगली में आयोजित यह राष्ट्रीय जंबूरी सफलतापूर्वक संचालित हो रही है और दिन-ब-दिन इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ को देश की पहली रेंजर–रोवर राष्ट्रीय जंबूरी की मेजबानी करने का गौरव मिला है, जो डायमंड जुबली वर्ष की अंतिम जंबूरी भी है। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन से प्रदेश का मान-सम्मान देशभर में बढ़ा है।

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