ट्रंप के टैरिफ से चीन की GDP में 1.5 प्रतिशत गिरावट, दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई थी

बीजिंग। डोनाल्ड ट्रंप और चीन के बीच टकराव की कहानी आज की नहीं है। जब वे पहली बार 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तभी उन्होंने बीजिंग से खुली जंग का ऐलान कर दिया था।
इसका असर इतना गहरा था कि चीन की GDP में 1.5% तक की गिरावट दर्ज की गई थी। यही नहीं, दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध ने वैश्विक सप्लाई चेन को भी बुरी तरह प्रभावित किया। ट्रंप के पहले कार्यकाल की शुरुआत 2017 में हुई। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वे अमेरिका का चीन के साथ व्यापार घाटा कम करेंगे। उस समय यह घाटा 355 अरब डॉलर था।
जनवरी 2018: ट्रंप प्रशासन ने सोलर पैनल पर 30% और वॉशिंग मशीन पर 20-50% टैरिफ लगाकर ट्रेड वॉर की नींव रखी। इसके बाद स्टील पर 25% और एल्यूमीनियम पर 10% टैरिफ लगाया गया, जिससे चीन जैसे बड़े निर्यातकों को बड़ा झटका लगा।
टैरिफ का चीन पर असर
- टैरिफ की सीधी मार चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ी।
- चीन की GDP में 1.5% की गिरावट दर्ज की गई।
- कई क्षेत्रों में निर्यात ठप हो गया।
- अमेरिका का चीन के साथ व्यापार घाटा 2018 में बढ़कर 419 अरब डॉलर हो गया।
अमेरिका का आरोप: बौद्धिक संपदा की चोरी
22 मार्च 2018 को अमेरिकी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें बताया गया कि चीन की नीतियां अमेरिकी कंपनियों को तकनीक साझा करने के लिए मजबूर करती हैं और उनकी बौद्धिक संपदा की चोरी की जाती है। ट्रंप ने कहा – “चीन हमारे इनोवेशन और रोजगार पर हमला कर रहा है। अब बहुत हो गया है।”
चीन की प्रतिक्रिया और ट्रूडो की फजीहत
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस विवाद के बीच फंस गए। चीन ने धमकी दी कि मेंग को छोड़ा नहीं गया तो गंभीर नतीजे होंगे। ट्रूडो सरकार पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा।





