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छत्तीसगढ़ में ठंडी रातें और गर्म दिन, अंबिकापुर में पारा 6 डिग्री के करीब

छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के उत्तरी इलाकों में रात के समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में दिन में गर्मी महसूस की जा रही है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।

रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में दिन के समय तापमान बढ़ने से गर्मी का असर रहा, वहीं रात में ठंड बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में विशेष बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन इसके बाद इसमें 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। अधिकतम तापमान में अगले एक सप्ताह तक बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।

मौसम विभाग ने बताया कि 8 फरवरी को प्रदेश के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छा सकता है। राजधानी रायपुर में हल्की धुंध रहने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान लगभग 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 15 डिग्री रहने का अनुमान है। पिछले दिन सबसे अधिक तापमान जगदलपुर में 31.2 डिग्री और सबसे कम अंबिकापुर में 6.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

सरगुजा, पेंड्रा और अमरकंटक जैसे इलाकों में ठंड का असर अधिक देखा जा रहा है। कई स्थानों पर सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।

ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। बीते एक महीने में सरकारी और निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, नवजात और छोटे बच्चों में ठंड का प्रभाव जल्दी पड़ता है, जिससे उनकी सेहत पर खतरा बढ़ जाता है।

हाइपोथर्मिया की स्थिति में शरीर का तापमान सामान्य स्तर से नीचे चला जाता है, जिससे शरीर के अंग ठीक से काम नहीं कर पाते। ठंडी हवा और नमी के संपर्क में आने से यह खतरा और बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग ने अपील की है कि शीतलहर के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे संतरा, नींबू और आंवला को आहार में शामिल करने की सलाह दी है। अदरक-तुलसी की चाय और काढ़ा भी सर्दी-जुकाम से बचाव में मददगार माना गया है।

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