छत्तीसगढ़ की बेटी ने रचा इतिहास, किरण पिस्दा बनीं भारतीय महिला फुटबॉल टीम की शान

छत्तीसगढ़ की धरती एक बार फिर गौरवान्वित हुई है। बालोद जिले की होनहार बेटी किरण पिस्दा ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो राज्य ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात है। जी हाँ भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने 22 साल बाद एएफसी महिला एशियन कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर इतिहास रच दिया है, और इस ऐतिहासिक जीत में किरण पिस्दा की भूमिका बेहद अहम रही।

डिफेंडर की भूमिका निभाते हुए किरण ने निर्णायक मुकाबले में मजबूत प्रदर्शन किया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही नहीं, किरण पिस्दा छत्तीसगढ़ की पहली महिला फुटबॉलर हैं, जिन्होंने यूरोपीय फुटबॉल क्लब से खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है
थाईलैंड में खेले गए मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम यानी थाईलैंड को 2-1 से हराया। इस जीत में मिडफील्डर संगीता बसफोर के दो गोल तो अहम रहे ही, लेकिन आखिरी मिनट तक डिफेंस को मजबूत बनाए रखना किरण की जिम्मेदारी थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
यही नहीं किरण 2014 से अब तक कटक, गोवा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान-निकोबार जैसे दर्जनों राज्यों में आयोजित जूनियर, स्कूल और सीनियर नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिताओं का हिस्सा रही हैं। 2022 में नेपाल में आयोजित साउथ एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था।
2023 में उन्होंने क्रोएशिया के क्लब से अनुबंध किया था। इससे पहले वे चेन्नई की सेतू एफसी और केरल ब्लास्टर्स वुमन टीम का भी हिस्सा रह चुकी हैं।
उनका फुटबॉल के प्रति समर्पण और कठिन परिश्रम ही है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।
किरण के माता-पिता के लिए ये पल किसी सपने से कम नहीं है। पिता महेश पिस्दा जिला निर्वाचन कार्यालय में क्लर्क हैं, मां एक गृहिणी हैं। लेकिन बेटी की इस उपलब्धि ने पूरे छत्तीसगढ़ को गर्वित कर दिया है।
बचपन में अभ्यास के लिए घर के पास मैदान नहीं था, लेकिन किरण रोज़ 500 मीटर दूर पैदल जाकर अभ्यास करती थीं। आज उनके इसी संघर्ष ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
वही परिजनों और वार्डवासियों का कहना है कि किरण ने बिना किसी सरकारी सहायता के यह मुकाम हासिल किया है। शुरू से ही उबड़-खाबड़ मैदानों में मेहनत और लगन से अभ्यास करती रहीं। अब उनके कठिन परिश्रम का फल उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा है।
किरण पिस्दा आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हजारों बेटियों की प्रेरणा बन चुकी हैं।





