छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रांसफर चुनौती वाली याचिका खारिज की

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में अशोक कुमार सिंह द्वारा ट्रांसफर आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी ने पहले ट्रांसफर पर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो बाद में उसी आधार पर नए ट्रांसफर को चुनौती नहीं दी जा सकती।
मामला क्या था?
अशोक कुमार सिंह नगर निगम चिरमिरी में सब-इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2017 में उन्हें नगर निगम चिरमिरी से नगर पंचायत लखनपुर (जिला सरगुजा) में पदस्थ किया गया। इसके बाद 21 फरवरी 2022 को राज्य सरकार ने उनका ट्रांसफर लखनपुर से नगर पंचायत कसडोल (जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) कर दिया। इस नए ट्रांसफर आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह ट्रांसफर अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है और बार-बार ट्रांसफर किया जा रहा है। 25 फरवरी 2022 को अदालत ने अंतरिम राहत (स्टे) दी थी, जिसके कारण वे लखनपुर में ही कार्यरत रहे।
राज्य की ओर से कहा गया कि 2017 में चिरमिरी से लखनपुर ट्रांसफर के समय याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं की। इसलिए नए ट्रांसफर को उसी आधार पर चुनौती देना उचित नहीं है।
अदालत का फैसला
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक ट्रांसफर (2017) पर कोई आपत्ति नहीं की और लगभग 3 वर्षों तक अंतरिम राहत का लाभ उठाया। ऐसे में बाद के ट्रांसफर को चुनौती देना स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए 25 फरवरी 2022 का अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया।
इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया कि ट्रांसफर आदेश पर समय पर आपत्ति न जताने वाले कर्मचारी बाद में उसे चुनौती नहीं दे सकते।





