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सरोद वादक देबस्मिता भट्टाचार्य की मनमोहक प्रस्तुति: भारतीय सांस्कृतिक विरासत का उत्सव

बिलासपुर, 26 मार्च 2025 – भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर को जीवंत बनाने के उद्देश्य से आधारशिला विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में आज एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। देश की युवा और प्रतिभाशाली सरोद वादक देबस्मिता भट्टाचार्य इस आयोजन की मुख्य आकर्षण रही हैं। यह कार्यक्रम SPIC MACAY (Society for the Promotion of Indian Classical Music And Culture Amongst Youth) के सहयोग से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों और युवाओं को भारतीय संगीत तथा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

देबस्मिता भट्टाचार्य, जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती हैं, ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से सभी उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। उनकी सरोद की मधुर धुनों में पारंपरिकता और नवीनता का अनूठा समागम देखने को मिला। अपने अद्वितीय वादन शैली के साथ, वह शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को एक नई अनुभूति प्रदान करती हैं।

देबस्मिता की संगीत यात्रा उनके पिता, पंडित देबाशीष भट्टाचार्य से आरंभ हुई, जो दिवंगत उस्ताद पद्मभूषण पंडित बुद्धदेव दासगुप्ता के वरिष्ठ शिष्य रहे हैं। किशोरावस्था में ही अपने पिता के गुरु की प्रत्यक्ष शिष्या बनकर, उन्होंने संगीत की गहराइयों में उतरना चुना। समुद्री इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक उज्जवल करियर की संभावनाओं को त्यागकर उन्होंने संगीत को अपना जीवन बना लिया। अंग्रेजी साहित्य में स्नातक तथा रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त कर, उन्होंने आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी में सात वर्षों तक स्कॉलर के रूप में कार्य किया।

राष्ट्रीय स्तर पर कोलकाता सहित विभिन्न शहरों में उनके कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 2017 में यूके के आठ दिवसीय दौरे से लेकर हालिया अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं में चीन, अफ्रीका और स्कैंडिनेविया के संगीतकारों के साथ मिलकर, देबस्मिता ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनके वाद्य – 23 तारों वाला फ्रेटलेस ल्यूट – की ध्वनि, पारंपरिक सरोद के मूल भावों को समाहित करते हुए भी आधुनिकता का स्पर्श देती है।

आज के कार्यक्रम में स्पीकमैके के फाउंडर डॉ. किरण सेठ एवं वरिष्ठ वॉलंटियर डॉ. अजय श्रीवास्तव के विशेष योगदान से यह आयोजन सफल रूप से संपन्न हो रहा है। आधारशिला विद्या मंदिर, बिलासपुर, के सभी संगीत प्रेमियों, छात्रों एवं अभिभावकों से आग्रह है कि वे इस सांस्कृतिक संध्या का हिस्सा बनकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का आनंद लें।

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