बिरनपुर हिंसा केस: ढाई साल बाद फिर तेज हुई सुनवाई, CBI ने छह नए आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराएं जोड़ने की मांग की

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के चर्चित बिरनपुर सांप्रदायिक हिंसा मामले में ढाई साल बाद सुनवाई की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। बुधवार को स्पेशल कोर्ट में हुई सुनवाई में CBI और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। सीबीआई ने कोर्ट में आवेदन देकर कहा कि जांच के दौरान छह नए आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे जुड़ी कई नई जानकारियां मिली हैं। एजेंसी का कहना है कि अब मामले में लगी धाराओं को गंभीर अपराधों की श्रेणी में बदला जाना जरूरी है।
वहीं, बचाव पक्ष ने सीबीआई के इस कदम का विरोध किया और कहा कि चार्जशीट में पहले ही सभी तथ्य शामिल हैं, इसलिए धारा बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में देरी करने वाला कदम बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस पर 19 नवंबर 2025 को अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
क्या है बिरनपुर हिंसा मामला?
8 अप्रैल 2023 को बेमेतरा के बिरनपुर गांव में दो बच्चों के बीच हुई मामूली झड़प ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया था। हिंसा के दौरान साजा विधायक ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर साहू (22) की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया और 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) और उनके बेटे ईदुल मोहम्मद (35) की हत्या भी कर दी गई। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने धारा 144 लागू की और करीब दो हफ्ते तक कर्फ्यू जारी रहा।
शुरुआती जांच में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने केस को CBI को सौंप दिया। एजेंसी की जांच में छह और नए आरोपी सामने आए हैं।
सीबीआई की चार्जशीट में नए खुलासे
सीबीआई ने 30 सितंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कई अहम बातें सामने आईं। एजेंसी ने कहा कि बिरनपुर हिंसा किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा नहीं थी, जैसा कि विपक्ष का आरोप रहा है। चार्जशीट में यह भी साफ किया गया कि पूर्व विधायक अंजोर यदु का नाम मामले में नहीं पाया गया, जबकि मृतक के पिता ईश्वर साहू ने पहले उन पर संदेह जताया था।
जांच के दौरान एजेंसी ने अप्रैल 2024 में बिरनपुर का दोबारा दौरा किया था और गवाहों से पूछताछ, सबूतों की वैज्ञानिक जांच और घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इसी प्रक्रिया में छह नए आरोपी चिन्हित किए गए और अब एजेंसी ने उनके खिलाफ कड़ी धाराएं जोड़ने की मांग की है।
अब नजरें 19 नवंबर के फैसले पर
कोर्ट अब 19 नवंबर को यह तय करेगा कि क्या आरोपियों पर कठोर धाराएं जोड़ी जाएंगी या नहीं। अगर सीबीआई का आवेदन मंजूर होता है, तो इस मामले की सुनवाई अगले चरण में तेजी से आगे बढ़ेगी।
इस बीच, विधायक ईश्वर साहू ने कहा कि वे अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए अंत तक संघर्ष जारी रखेंगे। वहीं, सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जांच अब अपने अंतिम चरण में है और एजेंसी इस पूरे केस को कानूनी रूप से मजबूत बनाने में जुटी है।
बिरनपुर हिंसा को छत्तीसगढ़ की सबसे संवेदनशील और जटिल साम्प्रदायिक घटनाओं में से एक माना जाता है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें 19 नवंबर को आने वाले फैसले पर टिकी हैं।





