बिलासपुर: वकील ने धोखे से किसान की ज़मीन हड़पी, हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी

बिलासपुर के खैरा गांव के एक किसान की ज़मीन धोखे से हड़पने के मामले में हाईकोर्ट ने वकील और उसके गवाह की सजा को सही ठहराया है। यह फैसला न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल ने सुनाया। वकील तुलाराम पटेल और उसके साथी सीताराम कैवर्त को तीन साल की सज़ा पहले ही सत्र न्यायालय ने दी थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
किसान मेहरचंद पटेल ने साल 2013 में शिकायत की थी कि वकील ने उसे ज़मानत के नाम पर बिलासपुर बुलाया और नशा देकर उसकी 8.85 एकड़ जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। जब किसान को इस धोखाधड़ी का पता चला, तो उसने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
जांच में सामने आया कि यह रजिस्ट्री 2011 में की गई थी और इसमें किसान के जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ था। पुलिस ने वकील के साथ-साथ गवाह, पटवारी और दस्तावेज़ लेखक को भी आरोपी बनाया था।
साल 2016 में सत्र न्यायालय ने चारों को तीन साल की सज़ा सुनाई थी। सभी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने पाया कि वकील ने किसान के भरोसे और उसकी पारिवारिक मजबूरी का गलत फायदा उठाया।
हालांकि, कोर्ट ने पटवारी अशोक ध्रुव और दस्तावेज़ लेखक देवनाथ यादव को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई पक्का सबूत नहीं मिला।





