डीएमएफ घोटाला मामले में पूर्व आईएएस की जमानत खारिज, हाईकोर्ट ने जताई सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी वरिष्ठ पद पर रह चुका है, ऐसे में गवाहों और सबूतों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएमएफ फंड में अनियमितताओं का मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि संबंधित अवधि में आरोपी अधिकारी महत्वपूर्ण पद पर तैनात था और उसी दौरान कथित गड़बड़ियां हुईं।
जमानत के खिलाफ सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से अदालत में जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। आरोप है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया और इसमें कई स्तरों पर आर्थिक अनियमितताएं हुईं। ऐसे में जमानत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है और गवाहों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर होते हैं और इनमें जानबूझकर लाभ कमाने की मंशा शामिल रहती है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आती है, इसलिए इस चरण पर जमानत देना उचित नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।





