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बांस-रॉड से शुरू की ट्रेनिंग, अब खेलो इंडिया में रजत जीतकर चमके बाबूलाल हेम्ब्रम

रायपुर। झारखंड के रामगढ़ जिले के छोटे से गांव केरिबांदा के रहने वाले बाबूलाल हेम्ब्रम की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल बन गई है। पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह की सलाह पर उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपनाया, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी।

पैसों की कमी के कारण बाबूलाल ने हार नहीं मानी और कंस्ट्रक्शन साइट पर बांस और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। बाद में उन्हें झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में मौका मिला, जहां पहुंचने के लिए उन्हें रोज 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था।

खेलो इंडिया में जीता रजत पदक

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में बाबूलाल ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि 2018 में जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की थी, तब उनके पास ट्रेनिंग के लिए जरूरी उपकरण भी नहीं थे, लेकिन कोच और संस्था के सहयोग से वे आगे बढ़ते गए।

परिवार की आर्थिक स्थिति रही कमजोर

19 वर्षीय बाबूलाल पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनकी मां स्कूल में रसोइया हैं और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और अब सफलता हासिल कर रहे हैं।

पहले भी जीत चुके हैं कई पदक

बाबूलाल ने 2024 में चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर व यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी पदक हासिल कर चुके हैं। फिलहाल वह पटियाला में राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

बड़ा सपना: भारत का प्रतिनिधित्व

बाबूलाल का कहना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का रजत पदक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। उनका सपना कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

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