समग्र शिक्षा मिशन में घोटाले के आरोप, विवादित कर्मचारियों की मंत्री बंगले में तैनाती पर सवाल

रायपुर में समग्र शिक्षा मिशन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद संबंधित कर्मचारियों की तैनाती शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले में किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस तैनाती की जानकारी स्वयं मंत्री को है, और यदि नहीं, तो आखिर यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया।
दरअसल, NICSI कंपनी के माध्यम से समग्र शिक्षा मिशन में कार्यरत कुछ कर्मचारियों—जिनमें प्रोग्रामर मुकेश मिश्रा और जगदंबा पांडेय शामिल हैं—पर लंबे समय से अवैध वसूली, पद के दुरुपयोग और टेंडर व भुगतान प्रक्रियाओं में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ये कर्मचारी वर्षों से एक ही जगह पदस्थ रहकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं और ठेकेदारों व अन्य कर्मचारियों पर दबाव बनाकर पैसे की मांग करते हैं। इसके बावजूद अब तक इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले एक जांच समिति भी गठित की गई थी, जिसमें चार अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट अब तक जमा नहीं हुई है। हर साल शिकायतें सामने आती हैं, जांच समितियां बनती हैं, लेकिन बिना निष्कर्ष के ही मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इसके अलावा वेतन विसंगति का मामला भी सामने आया है, जिसमें करीब 80 कर्मचारियों को निर्धारित राशि से कहीं अधिक वेतन दिए जाने का आरोप है, जबकि कई कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। आरोप है कि वेतन दिलाने के नाम पर कुछ कर्मचारियों द्वारा अपने ही साथियों से अवैध वसूली की जा रही है। इस पूरे प्रकरण से शासन को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है और मामला शिक्षा विभाग के उच्च स्तर तक पहुंच चुका है।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पूरा मामला कहीं न कहीं शिक्षा मंत्री की छवि को धूमिल करने की साजिश भी हो सकता है। दूसरी ओर, समग्र शिक्षा मिशन के प्रभारी एमडी दिनेश कुमार कौशिक ने स्वीकार किया है कि शिकायतें मिली हैं और जांच समिति गठित की गई है, लेकिन रिपोर्ट की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और व्यवस्था में विश्वास बहाल किया जा सके।





