निकायों में एल्डरमैन नियुक्ति अटकी, सरकार पर 23 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बोझ की आशंका

रायपुर। प्रदेश के 759 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में एल्डरमैन की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। कांग्रेस कार्यकाल में नियुक्त एल्डरमैन के बर्खास्त होने के बाद से ये पद खाली हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर निकायों में भाजपा पार्षद बहुमत में हैं, जिससे मनोनीत जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता कम महसूस की जा रही है।
एल्डरमैन की नियुक्ति होने पर सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। उनके मानदेय पर हर साल करीब 43 लाख रुपए और विकास कार्यों के लिए लगभग 23 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। वर्तमान में संबंधित वार्डों के लिए निर्वाचित पार्षदों को पहले से ही विकास निधि दी जा रही है, ऐसे में अतिरिक्त फंड देने से वित्तीय भार बढ़ने की संभावना है।
नगर निगम एक्ट 1956 की धारा 9 के तहत एल्डरमैन की नियुक्ति का प्रावधान है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नगरीय प्रशासन विभाग आदेश जारी करता है। एल्डरमैन आमतौर पर इंजीनियरिंग, स्वच्छता, वित्त और प्लानिंग जैसे क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को बनाया जाता है, ताकि निकायों के संचालन में विशेषज्ञ सलाह मिल सके।
रायपुर नगर निगम में 70 में से 60 वार्डों में भाजपा पार्षद निर्वाचित हुए हैं, जबकि बिलासपुर में 70 में से 49 वार्डों में भाजपा पार्षद हैं। इसी तरह अधिकांश निकायों में भाजपा का बहुमत है। इस कारण एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।




