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दुर्ग में अफीम खेती मामले में कृषि विस्तार अधिकारी निलंबित, पटवारी और सर्वेयर को नोटिस

दुर्ग जिले के समोदा गांव में एक खेत में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद जिला प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई करते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर की गई है। मामले में पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

जांच में सामने आया कि जिस खेत को मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां वास्तव में धान की फसल लगी हुई थी। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। कृषि विस्तार अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि प्रदर्शन प्लॉट किसान के बताए स्थान पर ही चुना गया था और नेटवर्क की समस्या के कारण फोटो सही तरीके से अपलोड नहीं हो पाई थी। उन्होंने यह भी बताया कि किसान की तबीयत खराब होने के कारण उसके प्रतिनिधि की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई थी।

अधिकारी ने यह भी कहा कि उन्हें प्रदर्शन बोर्ड कार्यालय से नहीं मिला था और खेत के आसपास बिजली की फेंसिंग तथा आवारा पशुओं की वजह से पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करना संभव नहीं हो पाया। हालांकि अधिकारियों ने इन कारणों को संतोषजनक नहीं माना और इसे अपने दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही बताया।

जिला कृषि विभाग की टीम ने 7 मार्च को समोदा गांव में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगाए गए मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस जमीन को मक्का का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां मक्का की फसल नहीं थी बल्कि धान की फसल लगी हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कृषि मैप पोर्टल पर असली किसान की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी और प्रदर्शन प्लॉट पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया था।

प्रशासन के अनुसार इस मामले में तीन कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है, जिनमें पटवारी अनिता साहू, फसल सर्वेयर शशिकांत साहू और कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू शामिल हैं। 11 मार्च को तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। एकता साहू का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य दो कर्मचारियों के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच में यह भी पता चला कि फसल सर्वेयर ने सितंबर 2025 में खेत का डिजिटल सर्वे किया था, जिसमें खसरा नंबर 309 को खाली जमीन और खसरा नंबर 310 में धान की फसल होने की जानकारी अपलोड की गई थी। बाद में इन्हीं जमीनों पर अफीम की खेती मिली। नियम के अनुसार सर्वेयर द्वारा अपलोड किए गए डेटा का मौके पर जाकर सत्यापन करना पटवारी की जिम्मेदारी होती है, लेकिन बिना जांच के ही रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन को मक्का का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वह भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार की जमीन है। मक्का की फसल दिखाकर उन्हें राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी दी गई थी और इसी जमीन के आधार पर निजी बैंक से ऋण भी लिया गया था। रिपोर्ट में जो फोटो अपलोड की गई थी वह असली खेत की नहीं थी, बल्कि किसी ग्रामीण को मक्का के खेत के पास खड़ा कर फोटो लेकर पोर्टल पर अपलोड कर दी गई थी। जांच में यह भी पाया गया कि जहां मक्का की फोटो ली गई थी, वहां से लगभग 100 मीटर की दूरी पर अफीम की खेती हो रही थी।

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