Acharya Institute In Controversies: अचार्य इंस्टीट्यूट में शिक्षकों की गुंडागर्दी का वीडियो वायरल
Acharya Institute In Controversies: हिन्दू संगठन के लोगो ने आचार्य इंस्टीट्यूट का किया घेराव

बिलासपुर में शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक शर्मनाक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। (Acharya Institute In Controversies) अचार्य इंस्टीट्यूट केकर्मचारियों द्वारा एक होम ट्यूटर दंपति के साथ की गई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सड़क पर अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के सामने पिटते एक शिक्षक की तस्वीर ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।
कोचिंग प्रचार कर रहे दंपति पर हमला (Acharya Institute In Controversies)
विओ:- पीड़ित शिक्षक ने बताया कि वो पिछले दस सालों से बिलासपुर में फिजिक्स की कोचिंग चला रहे हैं। इससे पहले वे देश के कई शहरों में कंप्यूटर शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं। हाल ही में वो अपनी कोचिंग का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। सड़क किनारे अपनी पत्नी के साथ पंपलेट बाँट रहे थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक शिक्षा पहुंच सके।किन तभी अचार्य इंस्टीट्यूट के कर्मचारियों आदिल खान और सर्वेश ने उन पर हमला कर दिया। शिक्षक की पत्नी और उनका मासूम बेटा वहीं खड़े थे — और उनकी आँखों के सामने पिता को बेरहमी से पीटा जा रहा था। उस पल ने हर देखने वाले के दिल को हिला कर रख दिया।
सोशल मीडिया पर गुस्सा फूटा,(Acharya Institute In Controversies)
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया। घटना के विरोध में आज विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अचार्य इंस्टीट्यूट का घेराव किया। उन्होंने ज़ोरदार नारेबाज़ी करते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा जो शिक्षा देने का दावा करते हैं, वही अगर गुंडागर्दी करें, तो ये समाज के लिए शर्म की बात है।घंटों चले विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार प्रबंधन को झुकना पड़ा। अचार्य इंस्टीट्यूट के जिम्मेदारों ने आरोपी शिक्षकों आदिल खान और सर्वेश को संस्था से बाहर करने की घोषणा की। प्रबंधन ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा की आड़ में हिंसा बिलासपुर का अचार्य इंस्टीट्यूट विवादों में
एक तरफ शिक्षक का उद्देश्य था शिक्षा देना, बच्चों का भविष्य संवारना। (Acharya Institute In Controversies) और दूसरी तरफ शिक्षा की आड़ में हिंसा का यह चेहरा, जिसने पूरे शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सवाल अब सिर्फ इतना है।क्या ऐसे शिक्षकों के हाथ में बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है?
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि व्यवहार से सिखाई जाती है। और जब एक शिक्षक खुद अपनी मर्यादा भूल जाए तो सबसे बड़ी चोट समाज के नैतिक मूल्यों पर पड़ती है।फिलहाल प्रबंधन के फैसले के बाद माहौल शांत है, लेकिन जिस तरह एक गुरु की गरिमा सरेआम कुचली गई।उस दर्द ने पूरे शहर के दिल को हिला दिया है।





