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ऐसा गांव जहां पहुंचने के लिए करना पड़ता है एशिया का सबसे ऊंचा ब्रिज पार?

भारत को गांवो का देश कहा जाता है, जहां हर बार कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने पर अलग-अलग गांव के नाम सामने आते हैं। यानी की हर कुछ किलोमीटर की दुरी पर गांव बदलते रहते हैं। भारत देश में कुल कितने गांव होंगे इसका पता लगाना काफी मुश्किल है। लेकिन क्या आप जानते हैं? कि हमारे देश में एक ऐसा भी गांव है, जो प्रकृति की गोद में बसा हुआ है, और यहां पहुंचने के लिए एशिया का सबसे बड़ा ब्रिज पार करना पड़ता है।

अगर आप नेचर लवर है, तो आपको एक बार लाहौर स्पीति जरीर जाना चाहिए। ये बेहद खूबसूरत जगह है। यहां आसपास रोहतांग, चंद्रताल झील, ताबो मठ, गंधोला किला और त्रिलोकनाथ मंदिर जैसी आकर्षक जगहें स्थित हैं। यहां पर एक ऐसा गांव भी है, जो प्रकृति की गोद में बसा है। इस गांव का नाम चिचम हैं। इस गांव तक पहुंचने के लिए चिचम ब्रिज होकर गुजरना होता है।

चिचम ब्रिज भारत का ही नहीं, बल्कि एशिया का सबसे ऊंचाई पर बना रोड ब्रिज है। यहां से गुजरने से पहले इंसान को काफी हिम्मत जुटानी पड़ती हैं। चिचम ब्रिज तक़रीबन 14 हजार फ़ीट ऊंचाई पर बना हैं। ये पुल 120 मीटर लंबा हैं और 150 मीटर ऊंचा हैं। इसे बनाने में ही 16 साल का समय लगा था। ये ब्रिज एक गहरी खाई को पार करता है और चिचम गांव को किब्बर से जोड़ता है, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाता है।

ऊंचे आसमानों को छूते पहाड़ों के बीच बने इस पुल से गुजरना ही अपने आप में एक चैलेंज है। इसे पार करने में बड़े-बड़े हिम्मती लोगों के भी हाथ-पांव फूल जाते हैं। ब्रिज के ऊपर खड़े होकर नीचे देखने पर आपको दिल और दिमाग को हिला देने वाल अनुभव होगा। फिर भी यहां आने वाले सैलानियों की कमी नहीं हैं। बाइकर्स ख़ास तौर पर यहां आना काफी पसंद करते हैं।

चिचम ब्रिज पूरे एशिया में सबसे ऊंचाई पर बना रोड ब्रिज है। इससे पहले ये खिताब चीन के पास था, क्योंकि चीन में सिंधु नदी के ऊपर एशिया के सबसे ऊंचे पुल का निर्माण किया गया था। लेकिन चिचम ब्रिज बनने के बाद ये खिताब भारत को मिल गया है। इस पुल के बनने से लोगों को काफी रहत मिली है। ब्रिज और और चिचम गांव की खूबसूरती देखने लाखों की संख्या में केवल देश के नहीं विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं।

एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों के लिए ये जगह बहुत सही है। इसे टूरिज्म और ट्रैकर्स का स्वर्ग कहा जाता है। अगर आप भी घूमने के शौकीन हैं, तो एक बार चिचम ब्रिज को देखने जरूर जाएं। स्पीति वैली ब्रिज पर लाइन से लगे रंगबिरंगे झंडे जब हवा में उड़ते है, तो ये नजारा देखने लायक रहता हैं। सैलानी यहां से पुल को पार करने के बाद चंद्रताल झील की ओर बढ़ सकते हैं। ये भारत की बेहद खूबसूरत झीलों में से एक है।

वही चिचम गांव से लगा हुआ एक और गांव है, जो काफी खूबसूरत है, इसे लोग छोटा तिब्बत भी कहते हैं। इस गांव का नाम किब्बर है। ये एक बेहद खूबसूरत गांव है। यहां का कल्चर तिब्बत और लद्दाख से काफी मिलता-जुलता है। इसी कारण इसे छोटा तिब्बत भी कहा जाता है। यहां की शानदार लोकेशन और प्रदूषण मुक्त वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करती है। चिचम जाने वाले अक्सर कर किब्बर गांव की खूबसूरती का दीदार करने वहां जरूर पहुंचते हैं।

चिचम ब्रिज, चिचम गाँव को काजा उपमंडल से जोड़ता है। इस ब्रिज को साढ़े 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। यह एक विशाल घाटी पर बना है और इसमें उच्च शक्ति वाले स्टील के तार लगे हैं। पुल बनने से गांव और काजा उपमंडल के बीच की दूरी 25 किलोमीटर कम हो गई है। गर्मियों में यहां का मौसम काफी सुहाना होता है, वही शर्दियों में यहां का तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। बता दें बारिश के मौसम में यहां यात्रा करने से बचाना चाहिए, क्योंकि इस दौरान सड़कें फिसलन भरी होती है, जिसके कारण हादसा की आशंका बनी रहती है।

यात्री पुल को पार करने के बाद चंद्रताल झील की और भी जा सकते हैं। ये एक ऐसा लेक है, जो हिमालय की तलहटी में मौजूद है। आप आसपास की जगहों पर भी घूम सकते हैं, जिसमें काज़ा, कॉमिक, लंगज़ा, धनकर, ताबो और नाको शामिल है। अगर आप और जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप मड गांव भी जा सकते हैं। बता दें चिचम ब्रिज हिमाचल के लाहौर स्पीति में स्थित है, जिसे चिचम गांव से जोड़ने बाद इस ब्रिज का नाम चिचम ब्रिज पड़ गया।

स्पीति घाटी और चिचम ब्रिज घूमने का सबसे अच्छा समय जून से सितंबर तक है जब सड़कें खुली होती हैं और मौसम सुहावना होता है। हालाँकि, यह पीक सीज़न भी है जब ज़्यादा पर्यटक आते हैं और कीमतें ज़्यादा होती हैं। अगर आप भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं और बर्फ़ से ढके परिदृश्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप अक्टूबर से मई तक यहाँ आ सकते हैं जब सड़कें बंद होती हैं लेकिन ट्रैकिंग या साइकिलिंग द्वारा पहुँचा जा सकता है।

स्पीति घाटी में मौसम बहुत ज़्यादा और परिवर्तनशील है। यह कुछ ही मिनटों में धूप से बादल, बारिश और बर्फबारी में बदल सकता है। मौसम और दिन के समय के आधार पर तापमान -30 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। आपको कई परतों में कपड़े पहनने चाहिए और गर्म कपड़े, धूप का चश्मा, सनस्क्रीन, टोपी, दस्ताने और जूते साथ रखने चाहिए। निर्जलीकरण और ऊंचाई की बीमारी से बचने के लिए आपको बहुत सारा पानी पीना चाहिए और शराब और धूम्रपान से बचना चाहिए।

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