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बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ निकाला गया मौन कैंडल मार्च, पूर्व मंत्री उमेश पटेल हुए शामिल

रायगढ़। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। छत्तीसगढ़ में इस मुद्दे पर पहली बार खरसिया में मौन कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल ने किया। उमेश पटेल की अगुवाई में खरसिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित यह मौन कैंडल मार्च सैकड़ों नागरिकों और समर्थकों के व्यापक समर्थन के साथ अग्रसेन चौक से प्रारंभ हुआ। यह मार्च डभरा रोड होते हुए जैन मेडिकल चौक और स्टेशन रोड से गुजरकर शहीद नंदकुमार पटेल स्मारक स्थल के लिए रवाना हुआ।

इस दौरान उमेश पटेल ने हाथों में जलती हुई मोमबत्ती लेकर सैकड़ों लोगों के साथ कदमताल किया और पीड़ित हिंदू समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की। कैंडल मार्च में शहर के हर धर्म के सैकड़ों नागरिकों के साथ-साथ खरसिया कांग्रेस परिवार, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई और खरसिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और हाथों में बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद हो, मार्च फॉर जस्टिस, हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करो जैसे संदेश लिखी तख्तियां लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

कैंडल मार्च के समापन पर शहीद नंदकुमार पटेल स्मारक स्थल पर आयोजित सभा में उमेश पटेल ने कहा कि, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचार न केवल अमानवीय हैं, बल्कि मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो हमारे पड़ोसी देशों को कड़ा संदेश देने से भी परहेज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या, उत्पीड़न और विस्थापन की कड़ी निंदा की और कहा कि, यह समय है जब भारत सरकार हिंदू समुदाय के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करे। इसके बाद दिवंगत हिंदुओं को श्रद्धांजलि दी गई और उनके न्याय के लिए एकजुटता का संदेश दिया गया। उमेश पटेल के नेतृत्व में निकली इस रैली ने यह स्पष्ट किया कि, खरसिया में हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता का संदेश देने और उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को जागरूक करने का प्रयास किया गया है। यह आयोजन न केवल खरसिया बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। खरसिया में यह कैंडल मार्च न्याय, मानवता और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा।

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