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मरवाही से आई भूखी बाघिन ने किया बछड़े का शिकार, सुरक्षा में डटे 60 कर्मचारी..

बिलासपुर। अमरकंटक से आई बाघिन ने मनेंद्रगढ़ के जंगल को ठिकाना बनाया है। रविवार को उसने जंगल के अंदर एक बछड़े का शिकार किया। बाघिन धीरे-धीरे गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उसकी सुरक्षा को लेकर विभाग बेहद गंभीर है।

यही कारण है कि कानन पेंडारी, मरवाही और रायपुर समेत स्थानीय वनमंडल के 60 कर्मचारियों की ड्यूटी निगरानी में लगाई गई है। विभाग की यह सक्रियता केवल बाघिन की वजह से है। अमरकंटक से जब मरवाही वनमंडल में बाघिन पहुंची, तो हड़कंप मच गया।

पूरा महकमा हरकत में आया और निगरानी में जुट गई। इसके पीछे उद्देश्य केवल बाघिन की सुरक्षा है। किसी तरह नुकसान होता है, तो इसकी जवाबदारी विभाग पर आ जाएगी। यही कारण विभाग चाह रहा है कि बाघिन पूरी तरह सुरक्षित रहे और वह सुरक्षित स्थान को अपना ठिकाना बना ले।

अलग-अलग क्षेत्रों से कर रहे निगरानी

इसके मद्देनजर ही इतनी अधिक संख्या में वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें कानन पेंडारी जू का रेस्क्यू दल भी शामिल है। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. पीके चंदन की अगुवाई में दल के सदस्य वहां पहुंचे हैं।

इसके अलावा मरवाही वनमंडल से 25 और रायपुर नोवा नेचर कैंप से पांच सदस्यीय दल को बाघिन की निगरानी ड्यूटी में लगाया गया। स्थानीय वनमंडल के वनकर्मी भी 25 की संख्या में तैनात है। सभी को अलग-अलग क्षेत्र में तैनात रहकर बाघिन की निगरानी करने के लिए कहा गया है।

बाघिन के पंजे के निशान कर रहे ट्रेस

बाघिन की निगरानी पंजे के निशान के आधार की जा रही है। निशान देखकर वन अमला बाघिन की तरफ बढ़ता है। इसके अलावा ड्रोन का भी सहारा लिया जा रहा है। वह धीरे-धीरे गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व की तरफ बढ़ रही है। उम्मीद है कि इस टाइगर रिजर्व को वह अपना ठिकाना बना सकती है।

रेस्क्यू करने की कोई योजना नहीं

बाघिन देखकर विभाग हरकत में आ गया है। पूरे वनकर्मियों के साथ कानन पेंडारी दल को मौके पर भेजा गया। उम्मीद थी कि बाघिन को रेस्क्यू करने की तैयारी है। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं है। इस संबंध में निर्देश देने के साथ केवल निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि बाघिन पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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