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कांग्रेस नेता सहित 13 लोगों ने सरकारी जमीन से लिया 3.56 करोड़ का ऋण, केस दर्ज…

अंबिकापुर। सरकारी जमीन के फर्जीवाड़ा के लिए बदनाम मैनपाट में एक और बड़ा घोटाला सामने आया हैं। यहां कूटरचित दस्तावेजों से शासकीय जमीन के भू-स्वामी बन बैठे लोगों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा कमलेश्वरपुर से तीन करोड़ 56 लाख रुपये का ऋण ले लिया।

जांच में मामला उजागर होने के बाद फर्जीवाड़े में शामिल राज्य गौ सेवा आयोग के पूर्व सदस्य और कांग्रेस नेता अटल बिहारी यादव सहित 13 लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। तहसीलदार मैनपाट ने कमलेश्वरपुर थाने जाकर अपराध पंजीकृत कराया है।

कुछ और मामलों की भी चल रही है जांच

इन आरोपितों के विरुद्ध कुछ और प्रकरणों की जांच चल रही है। कलेक्टर के रूप में विलास भोसकर की पदस्थापना के पहले तक सरगुजा में भू माफियाओं का बोलबाला था। कुछ राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर वे शासकीय बेशकीमती जमीन की हेराफेरी कर लाल हो रहे थे।

कलेक्टर विलास भोसकर की पदस्थापना के बाद पहली शिकायत मैनपाट में जमीन फर्जीवाड़े की आई। मैनपाट के कण्डराजा, उरंगा, नर्मदापुर,केसरा क्षेत्र में शासकीय जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम पर दर्ज कराया। इसके बाद समर्थन मूल्य पर धान भी बेचने लगे थे।

सरकारी जमीन से बने किसान, फिर लिया लोन

इस जमीन से ये बड़े किसान बन गए और जिला सहकारी बैंक की समितियों में किसान क्रेडिट कार्ड भी हासिल कर लिया। बाद में उसी जमीन के आधार पर बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लेने की शिकायत की जांच शुरू कराई।

साधन-संपन्न और प्रभावशाली लोग इस खेल में शामिल थे। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में पाया गया कि उक्त भूमि पर किसी प्रकार का पट्टा जारी नहीं हुआ था। वरन तत्कालीन पटवारियों के द्वारा अपने भुइयां आईडी से उक्त शासकीय भूमि को निजी भूमि के रूप में दर्ज किया गया था।

दोषी पाए जाने पर तीन पटवारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के साथ विभागीय जांच संस्थित की गई। कुल 173 खसरा नंबर की कुल 498 एकड़ भूमि को निजी मद से वापस शासकीय मद में दर्ज किया गया।

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